3 वोना बोधकथा लक लगत गोस्टी समजावून सांगयो,
"उत एक च मानूस धान्य पेरन गयो होतो। 4 उ पेरत होतो तरी काही दाना बाटमा गीर गयो उनला पक्सी आयके खाय गयीन। 5 वोको मा काही खडखड़ी जमीन मा गीरी उतानी माती की कमी होती। दाना लवकरच फुटली, अना माती खोल नव्हती। 6 पर जबा दिवस को ऊन पड़यो तबा झुडुप मा जर गयो, अना जड़ी जास्त खोल मा बड़यो नव्हती, महुन लवकर च झाड बड़ गयो।" 7 "काही बीज कांटा को झाड़ी मा गिरिन, काँटा मोठो भई गईन अना, फसल ला दबा देइन। 8 काही बीज साजरो जमीन मा पड़यो वय रोपां ना धान्य देइन काही ना संभर गुना काहीना साठ गुना काहींना तीस गुना।"
9 मग यीसु कहीस "जरा तुमरो कान आहेत तर आयको! मि काजक कव्हसू।"