संकट अना मुसीबत
3 जबा उ जैतून को पहाड़ मा बसो होतो, तबा चेला हुन ना वोला नीजी तौर मा कहीन, "सांगो यो गोस्टी कबा होयेत? मनजे अखीन संसार को अखट्ट को काजक हिदान होयेत? तोरो आवन को अना दुनियाँ को आखीर को काजक हिदान होहेत?"
4 यीसु ना जवाब दियो, "सतरक रव्हने" तुमीला कोनी नोको बहकाय। 5 लगत सो लोक गीन आयके, ना तुम्ही ला सांगेत" का मी मसीह सेउ।" अना गजब, लोक गीन बहक जाहेत। 6 तुमी लडाई-वडाई की गोस्टी आयको, तबा नोको डरावना काहेका असो होवनो जरुरी से, पर यो आखीर नाहत।