1 5 सातमें महेना तक इस्राएल के सबै लोग अपने नगर मै बस गै। फिर बे इकट्ठो हुई कै सातमें महेना मैं यरूसलेम मै इकट्ठे भै, 2 और योसादाक को लौड़ा यहोसू, बाके संग के पुजारियन, और सालतीएल को लौड़ा जरुब्बाबेल अपने भईय्यन के संग मिलकै, इस्राएल के परमेस्वर की बेदी कै फिर बनाईं, ताकी बे मूसा के व्यवस्था मै लिखे निर्देसन के जरिया परमेस्वर की बेदी मैं बलि चढ़ाए सकैं। 3 भलेई हुँआँ से निकारे भै लोग बौ देस मैं रहन बारे लोगन से डरात रहैं, बे बेदी कै हुनै बनाईं जहाँ बौ पहले ठाड़ी रहै। तौ बे एक बार फिर से बामैं सुबेरे और संजाखिन कै प्रभु परमेस्वर के ताहीं बलि चढ़ानो सुरु कर दईं। 4 बे झोपड़ियन के त्योहार कै मानीं, जैसे कि लिखो है, और हर दिन के होमबलि एक-एक दिन की गिनती और नियम के हिसाब से चढ़ाई; 5 और जाके अलावा बे हर दिन अग्नि-बलि, नये जोनी के त्योहार की बलि, तै करी भई प्रभु-त्योहारन मैं चढ़ाई जान बारी बलि, और प्रभु कै अपनी इच्छा से चढ़ाई जान बारी बलि देन लगे। 6 पर लोग हबै ले मंदिर को काम दुबारा से सुरू नाय करी रहैं, फिर भी बे सातमे महेना के पहले दिन से प्रभु के ताहीं अग्नि-बलि चढ़ानो सुरु कर दईं रहैं।
7 बे सब राजमिस्त्रिन और बढ़ईया कै रुपईया दईं, बे सीदोन और सोर देस के रहन बारेन कै खान-पीन को सामान और तेल दईं, ताकी बे देवदार की कठिया कै लबानेन देस से समुंदर की रस्ता, याफा नगर ले पुगाए दियैं, जौ सब फारस के राजा कुस्रू के जरिये इजाजत मिली रहै। 8 यरूसलेम मै परमेस्वर के मंदिर की जघा मैं वापस आन के बाद, साल के दुसरे महेना मैं बे काम सुरू करीं। जरुब्बाबेल, सालतीएल, योसादाक के लौड़ा यहोसू, और बाकी प्रजा, पुजारी, और लेवी, हिंयाँ तक कि जित्ते भईय्या-बंधु रहैं, यरूसलेम कै लौटियाए रहैं, सब काम मै लग्गै। बीस साल या बासे जाधे उमर के सब लेवियन कै मंदिर कै बनान के काम को अधिकारी बनाओ गौ। 9 येसु, बाके लौड़ा और भईय्या-बंधु और कदमीएल, हेनादाद और बाके लौड़ा, जो यहूदा गोत्र के लेवी वंसज रहैं, जे सब परमेस्वर के भवन मै काम करन बारे मजदूरन के काम की देखरेख करन बारे रहैं।
10 जब राजमिस्त्री मंदिर की बुनियाद डारन लागे, तौ पुजारी अपने लत्ता पहने और अपने हात मै तुरहिया लैकै आए, उनके संग आसाप के वंसज लेवी झाँझ लैकै हुँआँ आए। बे इस्राएल देस के राजा दाऊद के निर्देसन के हिसाब से प्रभु की स्तुति करीं। 11 बे जौ पंक्ति कै दोहरात भई प्रभु की स्तुति गाईं: "प्रभु भला है, और इस्राएल के प्रति बाको प्रेम अनंत है।"
सब जनी अपनी पूरी ताकत से जय-जयजयकार करत भई प्रभु परमेस्वर की स्तुति करन लागे, काहैकि मंदिर की बुनियाद को काम सुरू हुई चुको रहै। 12 तमान बड़े-बूढ़े पुजारी, लेवी और पुरखन के परिवारन के मुखिया पहले को मंदिर देखी रहैं, और जब बे जौ नया मंदिर की बुनियाद पड़त भई देखीं, तौ बे रोय पड़े और सोक करीं। लेकिन हुँआँ मौजूद दुसरे लोग खुसी से जय-जयजयकार करन लगे। 13 जय-जयजयकार और रोन को सुर दोनों एकै मै मिल गै। लोग अंतर ना जान पाईं कि जौ रोन को स्वर है कि जय-जयजयकार को, काहैकि बे जो जय-जयजयकार करीं बौ इत्ते जोड़न से करी रहैं कि जाकै मीलों दूर तक सुनो जाए सकत रहै।