दुनिया से दोस्ती
1 तुम्मैं लड़ाई और झगड़ा कहाँ से आथैं? का बे सुख विलासन से नाय जो तुमरे आँगन मैं लड़थै-भिड़थै? 2 तुम लालसा रखथौ, और तुमकै मिलत नाय है; तुम हत्या और डाह करथौ, कछु पाए नाय सकथौ; तुम झगड़थौ और लड़थौ; तुमकै जहे बजह से नाय मिलथै कि तुम मांगत नाय हौ।