1 मलमल लत्ता पहने भै स्वर्गदूत कहीं, "बौ समय महान स्वर्गदूत मीकाएल, जो तुमरे लोगन की रक्छा करथै, सामने आगो। तौ मुसीबत को समय आगो, जो देसन के पहली बार मैं आन के बाद से सबसे बुरो समय होगो। जब बौ समय आगो, तौ तुमरे राज्यन के सब लोग जिनके नाओं परमेस्वर की किताब मैं लिखे हैं, बचाए जांगे। 2 जो लोग पहलिये मर चुके हैं बामैं से कई फिर से जिन्दे होंगे: कुछ अनन्त जिंदगी को आनंद लेंगे, और कुछ कै अनन्त अपमान सहने होगो। 3 जो बुध्दिमान नेता हैं, बे आसमान के उजियारो के तराहनी चमक चमकंगे, और जो भौतन कै धर्मी बनात हैं, बे हमेसा तारन के तराहनी चमकन लगंगे।"
4 पर हे दानिय्येल, "तैं किताब कै सई से बंद करकै सब्दन कै अंत तक के ताहीं मोहरबंद कर दे। काहैकि तमान लोग ग्यान बढ़ान के ताहीं इतै-उतै जांगे।"
5 जब मैं, दानिय्येल नजर उठाएकै का देखो कि दुई आदमी ठाड़े हैं, एक तौ नदिया के जौ तट मैं, और दुसरो नदिया के बौ तट मैं है। 6 उन मैं से एक बौ मलमल के लत्ता पहने भै आदमी से, जो नदिया के पानी के ऊपर रहै, बासे कही, "जौ अचम्भित बात पूरी होन मैं कित्तो समय लगैगो?"
7 मलमल के लत्ता पहने भौ स्वर्गदूत अपने दोनो हात आसमान के घाँईं उठाई और अनन्त परमेस्वर को नाओं लैकै वादा करी। मैं बाकै जौ कहत भई सुनो, "साढ़े तीन साल ही जामंगे, तौ परमेस्वर के लोगन को दुख खतम ही जागो, तभई सचमुच जे सब बात पूरी होंगी।"
8 मैं सुनो कि बौ का कही, लेकिन मैं बौ समझ नाय पाओ। तौ मैं पूँछो, "लेकिन गुरुजी, जौ सब कैसे खत्म होगो?"
9 बौ जबाब दई, "तुमकै अब जाने होगो, दानिय्येल, के जे सब्द अंत समय आन तक बन्द और इन मैं मुहर दई भई है। 10 बहोत लोग खुदकै सुद्ध, और बेदाग और बनांगे, पर दुस्ट लोग दुस्टै बने रहमंगे। दुस्टन मैं से कोई नाय समझैगो, पर बुध्दिमान लोग समझंगे।
11 जब जे रोजाना की होमबलि उठाई जान बारी रुक जामंगी, जो घिनौनी चीजन कै उजाड़ कर देथै, स्थिर करी जागी, तभई बारह सौ नब्बै दिन बीत चुके होमंगे। 12 धन्य है बे जो 1335 दिन पूरे होन तक वफादार बने रहथैं!
13 अब तू जाएकै अंत तक ठहरो रहिए; और तू विसराम करत रहेगो; और बे दिनन के अंत मैं तू अपने निजी भाग मैं खड़ो होगो।"