9 वहाँ वह रात गुज़ारने के लिए एक ग़ार में चला गया।
रब इलियास की हौसलाअफ़्ज़ाई करता है
ग़ार में रब उससे हमकलाम हुआ। उसने पूछा, "इलियास, तू यहाँ क्या कर रहा है?"
11 जवाब में रब ने फ़रमाया, "ग़ार से निकलकर पहाड़ पर रब के सामने खड़ा हो जा!" फिर रब वहाँ से गुज़रा। उसके आगे आगे बड़ी और ज़बरदस्त आँधी आई जिसने पहाड़ों को चीरकर चट्टानों को टुकड़े टुकड़े कर दिया। लेकिन रब आँधी में नहीं था। 12 इसके बाद ज़लज़ला आया, लेकिन रब ज़लज़ले में नहीं था। 13 ज़लज़ले के बाद भड़कती हुई आग वहाँ से गुज़री, लेकिन रब आग में भी नहीं था। फिर नरम हवा की धीमी धीमी आवाज़ सुनाई दी। यह आवाज़ सुनकर इलियास ने अपने चेहरे को चादर से ढाँप लिया और निकलकर ग़ार के मुँह पर खड़ा हो गया। एक आवाज़ उससे मुख़ातिब हुई, "इलियास, तू यहाँ क्या कर रहा है?"