14 उनमें से थुआतीरा शहर की एक औरत थी जिसका नाम लुदिया था। उसका पेशा क़ीमती अरग़वानी रंग के कपड़े की तिजारत था और वह अल्लाह की परस्तिश करनेवाली ग़ैरयहूदी थी। ख़ुदावंद ने उसके दिल को खोल दिया, और उसने पौलुस की बातों पर तवज्जुह दी। 15 उसके और उसके घरवालों के बपतिस्मा लेने के बाद उसने हमें अपने घर में ठहरने की दावत दी। उसने कहा, "अगर आप समझते हैं कि मैं वाक़ई ख़ुदावंद पर ईमान लाई हूँ तो मेरे घर आकर ठहरें।" यों उसने हमें मजबूर किया।
40 चुनाँचे पौलुस और सीलास जेल से निकल आए। लेकिन पहले वह लुदिया के घर गए जहाँ वह भाइयों से मिले और उनकी हौसलाअफ़्ज़ाई की। फिर वह चले गए।