15 बेशक अपने हाथों को दुआ के लिए उठाते जाओ, मैं ध्यान नहीं दूँगा। गो तुम बहुत ज़्यादा नमाज़ भी पढ़ो, मैं तुम्हारी नहीं सुनूँगा, क्योंकि तुम्हारे हाथ ख़ूनआलूदा हैं। 16 पहले नहाकर अपने आपको पाक-साफ़ करो। अपनी शरीर हरकतों से बाज़ आओ ताकि वह मुझे नज़र न आएँ। अपनी ग़लत राहों को छोड़कर 17 नेक काम करना सीख लो। इनसाफ़ के तालिब रहो, मज़लूमों का सहारा बनो, यतीमों का इनसाफ़ करो और बेवाओं के हक़ में लड़ो!"
अल्लाह अपनी क़ौम की अदालत करता है
18 रब फ़रमाता है, "आओ हम अदालत में जाकर एक दूसरे से मुक़दमा लड़ें। अगर तुम्हारे गुनाह लहू-रंग हो जाएँ तो क्या वह बर्फ़ जैसे उजले हो जाएँगे? अगर वह क़िरमिज़ी जैसे लाल हो जाएँ तो क्या वह ऊन जैसे सफ़ेद हो जाएँगे?