6 एक दिन दबोरा ने बरक़ बिन अबीनुअम को बुलाया। बरक़ नफ़ताली के क़बायली इलाक़े के शहर क़ादिस में रहता था। दबोरा ने बरक़ से कहा, "रब इसराईल का ख़ुदा आपको हुक्म देता है, ‘नफ़ताली और ज़बूलून के क़बीलों में से 10,000 मर्दों को जमा करके उनके साथ तबूर पहाड़ पर चढ़ जा! 7 मैं याबीन के लशकर के सरदार सीसरा को उसके रथों और फ़ौज समेत तेरे क़रीब की क़ैसोन नदी के पास खींच लाऊँगा। वहाँ मैं उसे तेरे हाथ में कर दूँगा’।"
8 बरक़ ने जवाब दिया, "मैं सिर्फ़ इस सूरत में जाऊँगा कि आप भी साथ जाएँ। आपके बग़ैर मैं नहीं जाऊँगा।" 9 दबोरा ने कहा, "ठीक है, मैं ज़रूर आपके साथ जाऊँगी। लेकिन इस सूरत में आपको सीसरा पर ग़ालिब आने की इज़्ज़त हासिल नहीं होगी बल्कि एक औरत को। क्योंकि रब सीसरा को एक औरत के हवाले कर देगा।"
चुनाँचे दबोरा बरक़ के साथ क़ादिस गई।
14 तब दबोरा ने बरक़ से बात की, "हमला के लिए तैयार हो जाएँ, क्योंकि रब ने आज ही सीसरा को आपके क़ाबू में कर दिया है। रब आपके आगे आगे चल रहा है।" चुनाँचे बरक़ अपने 10,000 आदमियों के साथ तबूर पहाड़ से उतर आया।
21 यह कहकर सीसरा गहरी नींद सो गया, क्योंकि वह निहायत थका हुआ था। तब याएल ने मेख़ और हथोड़ा पकड़ लिया और दबे पाँव सीसरा के पास जाकर मेख़ को इतने ज़ोर से उस की कनपटी में ठोंक दिया कि मेख़ ज़मीन में धँस गई और वह मर गया।