61 लेकिन ईसा ख़ामोश रहा। उसने कोई जवाब न दिया। इमामे-आज़म ने उससे एक और सवाल किया, "क्या तू अल-हमीद का फ़रज़ंद मसीह है?"
62 ईसा ने कहा, "जी, मैं हूँ। और आइंदा तुम इब्ने-आदम को क़ादिरे-मुतलक़ के दहने हाथ बैठे और आसमान के बादलों पर आते हुए देखोगे।"
63 इमामे-आज़म ने रंजिश का इज़हार करके अपने कपड़े फाड़ लिए और कहा, "हमें मज़ीद गवाहों की क्या ज़रूरत रही! 64 आपने ख़ुद सुन लिया है कि इसने कुफ़र बका है। आपका क्या फ़ैसला है?"
सबने उसे सज़ाए-मौत के लायक़ क़रार दिया।