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O significado de espírito na Bíblia: corpo, alma e fôlego

O que significa espírito na Bíblia

Na Bíblia, a palavra "espírito" traduz o hebraico ruach e o grego pneuma, que significam literalmente sopro, vento ou fôlego de vida. As Escrituras usam o termo principalmente em três sentidos: o sopro divino que concede vida biológica ao ser humano, a dimensão imaterial e profunda da pessoa (onde ocorrem a consciência e a comunhão com o Criador) e o próprio Deus — em especial a pessoa do Espírito Santo.

Diferente do corpo material, o espírito humano representa o íntimo do ser, a vida que volta a Deus quando o corpo morre:

सुरुवात मैं, जब परमेस्वर स्वर्ग और पृथ्वी कै बनाई, पृथ्वी सुनसान और उजाड़ पड़ी रहै। और अथा गहरे पानी के ऊपर अंधियारो रहै, और परमेस्वर को आत्मा पानी के ऊपर मँडरात रहत रहै।(उत्पत्ति 1:1,2)

जैसे सरीर आत्मा बिना मरो भौ है, बैसिये बिस्वास भी काम बिना मरो भौ है।(Tiago 2:26)

परमेस्वर को बचन जिंदो, मजबूत, और दुईधारी तलवार जो प्राँड़, आत्मा, गाँठी-गाँठी और गूदा-गूदा कै अलग करकै सबै तरहन से काटथै, और जहाँ मन, आत्मा मिलथै बौ मन की इच्छा और बिचारन कै जाँचन मैं सक्छम है।(इब्रानियों 4:12)

O conflito entre a carne e o espírito

No Novo Testamento, os autores bíblicos contrastam com frequência o espírito e a "carne". Enquanto "carne" descreve a natureza humana inclinada ao pecado e marcada pela fragilidade moral, o "espírito" renovado por Deus inclina a pessoa a obedecer à vontade do Criador.

No Getsêmani, Jesus apontou essa fragilidade ao advertir os apóstolos a orar e vigiar, pois a disposição interior não anula a fraqueza humana sem a dependência de Deus:

जगत रहाबौ, और प्रार्थना करत रहाबौ, कि तुम परिक्छा मैं ना पड़ो! आत्मा तौ तैयार है, पर सरीर कमजोर है।"(मत्ती 26:41)

मैं कहथौ आत्मा के जरिया चलौ, तौ तुम अपनी सरीर की इच्छा कै पूरी नाय करैगे।(गलातियों 5:16)

हमरो सारीरिक स्वभाव जो चाहथै, बाके उल्टा आत्मा जो चाहथै, और जो आत्मा चाहथै, बाको बौ बिरोध करथै जो हमरो मानव स्वभाव चाहथै। जे दोनों दुस्मन हैं, और जाको मतलब है कि तुम बौ नाय कर सकथौ जौ तुम करनो चाहथौ।(गलातियों 5:17)

पर आत्मा को फल प्रेम, खुसी, सांति, धीरज, दया, भलाई, बिस्वास, नमरता और संयम है; ऐसे-ऐसे कामन के खिलाप मैं कोईये नियम नाय है।(गलातियों 5:22,23)

आत्मा हमकै जिंदगी दई है, बौ भी हमरी जिंदगी कै वस मैं करनो चाहिए।(गलातियों 5:25)

सरीर मैं मन लगानो तौ मौत है, लेकिन पवित्र आत्मा मैं मन लगानो जिंदगी और सांति है।(रोमियों 8:6)

मेरे प्रिय भईय्यौ, जब खिन कि जे प्रतिग्याएँ हमकै मिली हैं, तौ आबौ, हम अपने आपकै सरीर और आत्मा की सब मलिनता से सुद्ध करैं, और परमेस्वर को डर मानत भै पवित्रता कै पूरो करैं।(2 कुरिन्थियों 7:1)

A habitação do Espírito Santo no crente

A teologia bíblica ensina que a vida cristã não se sustenta no esforço puramente humano. A partir da fé em Cristo, o Espírito Santo passa a habitar no interior do crente, transformando seu corpo em templo e dando testemunho de que ele foi adotado como filho de Deus:

का तुम नाय जानथौ, कि तुमरो सरीर पवित्र आत्मा को मंदिर है, जो तुम मैं बसो भौ है और तुमकै परमेस्वर के घाँईं से मिलो है? और तुम अपने नाय हौ, लेकिन परमेस्वर हौ; परमेस्वर तुमकै दाम दैकै मोल लई है, तभईये अपने सरीर से परमेस्वर की महिमा करौ।(1 कुरिन्थियों 6:19,20)

इंसानन मैं से कौन इंसान की बातन कै जानथै, सिरफ इंसान की आत्मा जो बामै है? बैसिये परमेस्वर की बातन कै भी कोई नाय जानथै, सिरफ परमेस्वर की आत्मा जानथै।(1 कुरिन्थियों 2:11)

अगर मसीह तुमरे मैं है, तौ सरीर पाप की बजह से मरी भइ है; लेकिन आत्मा धर्म के बजह से जिंदी है।(रोमियों 8:10)

तभईये जित्ते आदमी परमेस्वर की आत्मा के चलाय चलथैं, बेईं परमेस्वर के बालका हैं।(रोमियों 8:14)

परमेस्वर तुमकै जो आत्मा दई है, बौ तुमकै गुलाम नाय बनाथै, और ना तुमकै डरपाथै; बल्किन, उल्टा आत्मा तुमकै परमेस्वर को बालका बनाथै, और आत्मा के बल से हम परमेस्वर कै पुकारथैं, "परमपिता! मेरे परमपिता!" परमेस्वर की आत्मा खुदै हमरी आत्मा के संग गभाई देथै, कि हम परमेस्वर के बालका हैं।(रोमियों 8:15,16)

ऐसियै आत्मौ हमरी कमजोरी मैं मदत करथै, काहैकि हम जानतै ना हैं, कि प्रार्थना कैसे करकै करनो चाहिए; आत्मा खुदै ऐसे आँह भर-भरकै जो बखान करन से परे है, हमरे ताहीं मिन्नत करथै।(रोमियों 8:26)

कि बौ अपनी आत्मा के जरिये तुम लोगन कै अपनी महिमा मैं धन अनुसार तुमकै सक्ति और सामर्थ्य देबै, और मैं प्रार्थना करथौं कि मसीह बिस्वास के जरिया से तुमरे मन मैं अपनो घर बनाबै। मैं प्रार्थना करथौं कि तुम अपनी जरन और प्रेम की बुनियाद रख सकौ,(इफिसियों 3:16,17)

और, कि हमरे प्रभु ईसु मसीह को परमेस्वर जो महिमा को परम दऊवा है, तुमकै ऐसी आत्मा देगो जो तुमकै ग्यानी बनाए और परमेस्वर को प्रगट करे ताकी तुम अच्छे तरह से पहचान सकौ।(इफिसियों 1:17)

हमकै यकीन है कि हम परमेस्वर के संग एक रहथैं और बौ हमरे संग एक रहथै, काहैकि बौ हमकै अपनी आत्मा दई है।(1 यूहन्ना 4:13)

तुम चाँहे जित्ते बुरे होबौ, तुम अपने बालका कै अच्छी चीज देनो जानथौ, तौ तुमरो स्वर्गिय दऊवा अपने माँगन बारे कै पवित्र आत्मा काहेकै ना देगो!"(लूका 11:13)

फिर बे देखीं कि आगी की जीभ कैसी दिखाए रइ है जो फैल गई और हुँआँ सबै आदमी कै छुइ लई। और बे सब पवित्र आत्मा से भर गै, और पवित्र आत्मा उनकै बोलन की सामर्थ्य दई, और बे अलग-अलग भासा बोलन लगे।(प्रेरितो के काम 2:3,4)

काहैकि मोकै पता है कि तुमरी प्रार्थना और ईसु मसीह की आत्मा की मदत से जो कछु भौ है, मैं बच जांगो।(फिलिप्पियों 1:19)

परमेस्वर जो आसा को देन बारो है तुमकै बिस्वास करन मैं सब हानी खुसी और सांति से भरै, कि पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से तुमरी आसा बढ़त चली जाबै।(रोमियों 15:13)

Adoração em espírito e renovação da mente

Ao conversar com a mulher samaritana, Jesus afirmou que Deus é espírito. Isso significa que o relacionamento com o Criador não está preso a montanhas, ritos exteriores ou templos locais, mas exige sinceridade interior e conformidade com a verdade bíblica:

लेकिन बौ समय आए रौ है, और अभईयो है, जोमैं सच्चे भक्त दऊवा की आराधना आत्मा और सच्चाई से करंगे, काहैकि दऊवा अपने ताहीं ऐसिये सभाघर करन बारे कै ढूँड़थै। परमेस्वर आत्मा है, और जरूरी है की बाकी आराधना करन बारे आत्मा और सच्चाई से सभाघर करैं।"(यूहन्ना 4:23,24)

तौ अब का करनो चहाईये? मैं आत्मा मैं भरकै प्रार्थना करंगो, और दिमाकौ मैं हुईकै प्रार्थना करंगो, मैं आत्मा से गांगो, और दिमाक से भी गांगो।(1 कुरिन्थियों 14:15)

कड़ी मेहनत करैं और आलसी ना बनै; आत्मिक धुन और हौंसला से भरे रहबौ प्रभु की सेवा करत रहबौ।(रोमियों 12:11)

और हम, जो उनके मोहों से प्रभु की महिमा निहारथैं, उनके हानी धीरे-धीरे बढ़त भइ महिमा के संग बदलत जाए रैं हैं, जौ महिमा प्रभु से, जो आत्मा है, दुआरे निकरथै।(2 कुरिन्थियों 3:18)

जो आत्मा परमेस्वर हमकै दई है बौ हमकै डरपुकना नाय बनाथै; जाके अलावा, बाकी आत्मा हमकै सक्ति, प्रेम और अपने आपकै काबू मैं रखान की आत्मा दई है।(2 Timóteo 1:7)

As promessas proféticas e o discernimento

Os profetas do Antigo Testamento anunciaram que Deus colocaria um espírito novo e retiraria o coração insensível de Seu povo. O texto sagrado também orienta o crente a exercer domínio sobre as próprias reações e a discernir as influências espirituais à luz da Palavra:

मेरे प्रिय दोस्तौ, बे सबन ऊपर बिस्वास मत करौ जो आत्मा होन को दाबा करथैं, लेकिन उन्हैं जौ पता लगान के ताहीं परखथैं कि का बे आत्मा परमेस्वर के घाँईं से आईं हैं कि ना; काहैकि तमान झूठे भविस्यवक्ता दुनिया मैं निकर खड़े भै हैं।(1 यूहन्ना 4:1)

परमेस्वर मोकै जो आस्चार्य के काम और चमत्कार दिखाई है, उनकी और मेरी बात प्रकट करनो चाहथौं।"

"परमेस्वर हमैं कितने महान चमत्कार दिखाथै!

बौ जो चमत्कार करथै बे कित्तो सक्तिसाली है!

परमेस्वर हमेसा राजा है; बौ हमेसा राज्य करैगो।"(दानिय्येल 4:2,3)

A postura correta diante de Deus: humildade de espírito

A Bíblia destaca que Deus acolhe quem reconhece a própria dependência e necessidade de perdão. Quando o rei Davi se arrependeu de seus pecados graves, ele pediu não poder terreno, mas a renovação de um espírito íntegro em seu interior:

"धन्य बे हैं, जो मन के दीन हैं;

स्वर्ग को राज्य उन्हईं को है!"(मत्ती 5:3)

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