Juízo de Deus: o que significa e como ele restaura a justiça
O que significa o juízo de Deus
O juízo de Deus é a avaliação justa e definitiva que Ele faz de todas as pessoas, obras e intenções humanas. Longe de ser apenas condenação ou castigo, o juízo bíblico é o acerto de contas que restabelece a verdade, corrige a injustiça e separa o mal do bem.
A Escritura ensina que nada fica encoberto diante dessa avaliação:
क्यूँके परमेसवर सारे काम्मां का अर सारी गुप्त बात्तां का, चाहे वे आच्छी हो या बुरी हो, न्याय करैगा।(सभोपदेशक 12:14)
No Novo Testamento, essa autoridade foi confiada a Jesus Cristo. Ele revela os corações e exerce a justiça de Deus tanto para salvação dos que creem quanto para discernimento dos que o rejeitam:
जिसा पिता मरे होया नै ठावै अर जिवांवै सै उस्से ढाळ बेट्टा भी जिननै चाहवै सै उननै जिवांवै सै। पिता किसे का न्याय कोनी करदा, पर न्याय करण का सारा काम बेट्टे ताहीं सौंप राख्या सै, ताके सारे माणस जिस ढाळ पिता की इज्जत करै सै उस्से ढाळ बेट्टे की भी इज्जत करै। जो बेट्टे की इज्जत कोनी करदा, वो पिता की भी इज्जत कोनी करदा, जिसनै उस ताहीं भेज्या सै।"
मै थारैतै साच्ची-साच कहूँ सूं, जो मेरा वचन सुणकै उसपै बिश्वास करै सै, जिसनै मेरै ताहीं भेज्या सै, वो अनन्त जीवन पावै सै, अर उसपै दण्ड का हुकम कोनी होन्दा, पर वो मौत नै पार करकै जीवन म्ह दाखल हो लिया सै। "मै थारैतै साच्ची-साच कहूँ सूं, वो बखत आवै सै, अर इब सै, जिस म्ह मरे होड़ परमेसवर के बेट्टे का वचन सुणैगें, अर जो सुणैगें वे जिवैंगे। क्यूँके जिस ढाळ तै पिता खुद म्ह जीवन राक्खै सै, उस्से ढाळ तै उसनै बेट्टे ताहीं भी यो अधिकार दिया सै के खुद जीवन राक्खै। बल्के मेरे ताहीं माणसां के न्याय करण का भी अधिकार दिया सै, ज्यांतै के मै माणस का बेट्टा सूं।"
इसतै हैरान मतना होओ: क्यूँके वो बखत आवै सै के जितने मरे होए लोग कब्रां म्ह सै वे मेरा वचन सुणकै लिकड़ आवैंगे। जिन नै भले काम करे सै वे जीवन कै पुनरुत्थान खात्तर जी जावैंगे अर जिन नै बुरे काम करे सै वे दण्ड के पुनरुत्थान खात्तर जी जावैंगे।
"मै खुद तो कुछ कोनी कर सकदा, जिसा सुणु सूं, उस्से तरियां न्याय करुँ सूं, अर मेरा न्याय सच्चा सै, क्यूँके मै अपणी मर्जी कोनी पर अपणे भेजण आळे की मर्जी चाहूँ सूं।"
जै मै खुदे अपणी गवाही द्यूँ, तो मेरी गवाही साच्ची कोनी।(यूहन्ना 5:21-31)
उसनै कह्या, "हे प्रभु, मै तेरे पै बिश्वास करुँ सूं।" अर उस ताहीं मोध्धा पड़कै प्रणाम करया।
फेर यीशु बोल्या, "मै इस दुनिया म्ह न्याय खात्तर आया सूं, ताके जो आन्धे सै, वे देक्खै, अर जो देक्खै सै, वे आन्धे हो जावै।"(यूहन्ना 9:38,39)
A cruz é o ponto central desse julgamento: ali o pecado foi julgado e o poder que escravizava a humanidade foi quebrado:
इसपै यीशु नै कह्या, "या आवाज मेरै खात्तर न्ही, पर थारे खात्तर आई सै। इब इस दुनिया का न्याय होवै सै, इब इस दुनिया का अधिकारी काढ्या जावैगा। अर मै जै धरती पै तै ऊँच्चे पै चढ़ाया जाऊँगा, तो सारया नै अपणे कान्ही खिच्चुगाँ।"(यूहन्ना 12:30-32)
फेरभी मै थारैतै साच्ची कहूँ सूं, के मेरा जाणा थारे खात्तर ठीक सै, क्यूँके जै मै ना जाऊँ तो वो मददगार थारे धोरै कोनी आवैगा, पर जै मै जाऊँगा, तो उस ताहीं थारे धोरै भेज्जूँगा। वो आकै दुनिया के माणसां ताहीं पाप अर धार्मिकता अर न्याय कै बाबत बतावैगा। पाप कै बारै म्ह ज्यांतै के वे मेरै पै बिश्वास कोनी करदे।(यूहन्ना 16:7-9)
A prestação de contas de cada pessoa
A Bíblia ensina que ninguém passa despercebido diante de Deus. Cada indivíduo responderá pessoalmente por suas escolhas, atitudes e pela forma como lidou com a verdade revelada:
जो माणस बिश्वास म्ह कमजोर सै, उस ताहीं अपणी संगति म्ह ले ल्यो, पर उस ताहीं के करणा चाहिए के न्ही करणा चाहिए इस बारें म्ह बहस ना करो। एक नै बिश्वास सै, के सारा कुछ खाणा सही सै, पर जो बिश्वास म्ह कमजोर सै वो साग-पात ए खावै सै। अर माँस-मच्छी खाण आळे साग-पात खाण आळे ताहीं तुच्छ ना जाणै, अर ना साग-पात खाणआळा, माँस-मच्छी खाणआळे पै दोष लावै, क्यूँके परमेसवर नै दोंनुआ ताहीं अपणाया सै। तू कौण सै जो दुसरे कै नौक्कर पै दोष लावै सै? पर उसकी कामयाबी या नाकामयाबी उसकै माल्लिक कै ए हाथ्थां म्ह सै, बल्के वो कामयाब ए कर दिया जावैगा, क्यूँके प्रभु उस ताहीं कामयाब कर सकै सै।(रोमियों 14:1-4)
ज्यांतै म्हारै म्ह तै हरेक नै अपणे-अपणे काम का लेक्खा परमेसवर ताहीं देणा पड़ैगा।
इस खात्तर आग्गै तै हम एक-दुसरे पै दोष न्ही लावांगें, पर थम या ठान ल्यो के कोए अपणे बिश्वासी भाई कै स्याम्ही पाप करण की बजह ना बणै। मन्नै बेरा सै अर प्रभु यीशु म्ह मन्नै पक्का यकिन होया सै, के कोए खाण-पीण की चीज अपणे-आप तै अशुद्ध कोनी, पर जो उस ताहीं अशुद्ध समझै सै, उसकै खात्तर अशुद्ध सै।(रोमियों 14:12-14)
ज्यांतै जिब ताहीं प्रभु का आणा ना हो, कोए किसे नै परखै ना, वो माणसां के विचारां नै साफ-साफ जाहिर कर देगा, अर वो माणसां के मनां के मकसद नै दिखावैगा, फेर परमेसवर की ओड़ तै हरेक की बड़ाई होवैगी।(1 कुरिन्थियों 4:5)
Esse exame criterioso começa pelo próprio povo de Deus. Por saber que todos estão debaixo do mesmo padrão reto, os cristãos são chamados a abandonar a censura hipócrita contra os outros:
क्यूँके वो बखत आण पोंहच्या सै, के पैहल्या परमेसवर के माणसां का न्याय करया जावैगा, अर जिब के न्याय की शरुआत म्हारै ए तै होगी, तो उनका के अन्त होगा जो परमेसवर के सुसमाचार नै न्ही मानते?(1 पतरस 4:17)
क्यूँके जिस तरियां थम दुसरयां पै दोष लगाओ सों, उस्से तरियां परमेसवर भी थारे पै दोष लगावैगा, जिस तरियां तै थम दुसरयां का न्याय करो सों, उस्से तरियां थारा भी न्याय करया जावैगा।"
"तू क्यूँ अपणे भाई की आँख कै तिन्कै जिसी छोट्टी सी बुराई नै देक्खै सै, अर अपणी आँख म्ह लठ जिसी बड़ी बुराई तन्नै कोनी दिखदी?" जिब तेरी-ए आँख म्ह लठ सै, तो तू अपणे भाई तै किस तरियां कहवै सै, "ल्या मै तेरी आँख तै तिन्का लिकाड़ द्यु।"(मत्ती 7:2-4)
O juízo como livramento e restauração
Para quem sofre a maldade e a opressão, o juízo divino não é ameaça, mas promessa de socorro. No Antigo Testamento, os juízos de Deus contra o Egito foram os atos concretos pelos quais Ele libertou o seu povo da escravidão:
इस कारण तू इस्राएल के माणसां तै कह, ‘मै यहोवा सूं, अर मै थारे ताहीं मिस्रियाँ कै उस बोझ कै तळै तै लिकडूँगा, अर उनकी गुलाम्मी तै थमनै छुड़ाऊँगा, अर अपणी बांह बढ़ाकै अर भारी सजा देकै थमनै छुड़ा ल्यूँगा,(निर्गमन 6:6)
क्यूँके उस रात नै मै मिस्र देश कै बिचाळै म्ह तै होकै जाऊँगा, अर मिस्र देश के हरेक माणस के अर पशु के, सारया के जेठ्यां नै मारूँगा; अर मिस्र देश के सारे देवत्यां नै भी मै सजा दियुँगा; मै तो यहोवा सूं।(निर्गमन 12:12)
Reconhecer que Deus é o juiz legítimo leva tanto ao arrependimento sincero diante da própria culpa quanto à confiança de que o santuário e a honra de Deus não serão derrotados pelo mal:
मन्नै सिर्फ तेरैए बिरुध्द पाप करया,
अर तेरी निगांह म्ह जो बुरा सै, वोए करया सै,
ताके तू बोल्लण म्ह धर्मी
अर न्याय करण म्ह निष्कलंक ठहरै।(भजन संहिता 51:4)
अर इब वो उस भवन की नक्काशी नै,
कुहाड़ियाँ अर हथौड़ा तै कती तोड़ देवै सै।
उननै तेरे पवित्र स्थान ताहीं आग म्ह झोंक दिया सै,
अर तेरे नाम के भवन ताहीं गेर कै अशुद्ध कर दिया सै।(भजन संहिता 74:6,7)
सिय्योन सुणकै खुश होया,
अर यहूदा की बेट्टी मगन होई;
हे यहोवा, यो तेरे नियमां कै कारण होया।(भजन संहिता 97:8)
O desfecho da história humana culmina no triunfo final dessa justiça, quando todo engano e tirania são definitivamente julgados e removidos:
इसकै बाद मन्नै सुर्ग म्ह मान्नो भीड़ ताहीं जोर तै न्यू कहन्दे सुण्या, के, हालेलूय्याह! उद्धार, महिमा, अर सामर्थ, म्हारै परमेसवर ए की सै। क्यूँके उसका न्याय सच्चा अर सही सै, ज्यांतै के उसनै उस बड्डी बेश्या का जो अपणी जारी तै धरती के माणसां तै पाप करवाण लागरी थी, परमेसवर नै उस ताहीं दण्ड देकै अपणे दास्सां कै लहू का बदला लिया सै। फेर दुसरी बर उननै कह्या, हालेलूय्याह! अर बेबीलोन नगर कै जळण का धुम्मा युगानुयुग उठदा रहवैगा।(प्रकाशितवाक्य 19:1-3)
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