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Preservação das escrituras

Por Bíblia Online

A Palavra de Deus permanece para sempre. As Escrituras foram preservadas por Deus ao longo dos milênios para instrução, consolação e guia de todas as gerações.

A Palavra eterna

Céus e terra passarão, mas as palavras de Deus jamais passarão. Sua Palavra é eterna, infalível e imutável — a verdade que sustenta tudo.

सरऔर तरतटल़ी ओगी, पर वचन कदि टला।"

कऊि आऊसचलगलणि जदतक सरऔर तरति टल़ी ओगी, तदतक िएक एक ििऊए ि टला।

ओआ ओर रझओए, पर परमशरवचन सदअटलरणा।

कऊि पवि,

"हर एक ़ा

और हर एक़ी ,

ओआ और चढ़ी ओआ,

पर रभवचन ो-तक रणा"

और वचन मससम, ा।

नयिदगपरमशरतरफी। िदगशवि पर अविमतलब परमशरिऔर सदठईरऩे वचनकऊि पवि,

"हर एक ़ा

और हर एक़ी ,

ओआ और चढ़ी ओआ,

पर रभवचन ो-तक रणा"

और वचन मससम, ा।

A inspiração divina

Toda Escritura é inspirada por Deus. Homens santos falaram da parte do Senhor, e a Palavra escrita é a expressão fiel da vontade divina.

पर सबपईलसमजि पविभवियबआपणचणि कऊि भवियबूंइचकदपनि ऊई, पर भवियबकपविआतपरपरमशरतरफे।

परमशरवचन, जरि

जमपरमशरप-दकई लग-लग तरभवियबकजरिगलििा। पर इनआखरिपरमशरआसजरिगलििा। परमशरआपणजरििरचऔर रस ठरा। परमशरमहिरयसरततसब आपणमरवचनसम़ी ; वरपरमशराँकन

और वचन ूं शरआयऔर और सचईयपरिऊई आसिऔर आससरएड़ी महिी, ़ी िएकलमहिा।

पति परमशर कर, सदिरणा, िबढ़ासकदओर कटसकदे, परमशर एड़ा इजकर, ि सरडर ो।

A Palavra como guia e tesouro

A Palavra de Deus é lâmpada para os pés, espada do Espírito e tesouro para o coração. Guardá-la e meditá-la nos protege do pecado.

ैं वचन आपणिरण करे,

ि खलि करुँ।

िपरमशरमहि

िपरमशरवरि, समजसकि बऊत महओर िसरिबणि

हर एकूं़ा परमशरबतओआ, ओर आगलि

ओर हर एकूं़ी आसिओई ि परमशर बड़ा मह

ओर ा,

िशबि णदा।

िआवतरतिाँूँ

ओर िवचन िकनतक पऊे।

परमशरसररजिएक मणडप खड़ा करा,

एड़ा िकल़ो़ा ़ा आपणमईलिकल़ो

़े ि़ी ़ा आपणओआ

सरएक िकल़ो

ओर ितक चककर लगओआ

ओर सरगरसबपऊ

यहिखर, नवीं िदगओआ;

यहियम पर,

शरूंअकलमबणओए

यहउपदि, मनकरओए;

यहआज, आखि लई आओई;

रभयदपर,

ाँि़ा, पटििाँगल़ा

कर

रभु, ां बचे,

िएड़ेसदबच

पर ? "परमशरवचन , ुंऔर मन" िवचन , आसरचकरूँ

िणनऔर णनमसवचनओआपर आऊूँ, िमसि ा? जर, कऊि पवििा,

"िआवतरतिाँे,

और िवचन िकनतक पऊे।"

ितणिगलपईलपविििा, आसितर ििि आससबऔर पवििजरिउमूँ।

आजआऊआज सदखणिां। ओर ैं आपणल-बचसमजयििां ओर कअरे, चलदे, टदे, उठदइनचरकरदरणा। आपणआथिनणिां ओर आखकरो। आपणे-आपणकअरखटकनओर आपणरवाँिखणिां।

िनतकरूँि मससको, , ि परमशरभरपितक परिऊई

उदरकरपरमशरअचलगऔर टबा। परमशर ओआ ि सबूंउदऔर सचक-टपछयो।

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