11 जिब तै लगातार होमबलि ठाई जावैगी, अर वो घिनोणी वस्तु जो उजाड़ करा देवै सै, स्थापित करी जावैगी, फेर तै बारहा सौ नब्बे दिन बीतैगें। 12 कितणे धन्य सै वो, जो धीरज धरकै तेरै जीवन के तेरह सौ पैंतीस दिन के अन्त ताहीं भी पोहचे।
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11 जिब तै लगातार होमबलि ठाई जावैगी, अर वो घिनोणी वस्तु जो उजाड़ करा देवै सै, स्थापित करी जावैगी, फेर तै बारहा सौ नब्बे दिन बीतैगें। 12 कितणे धन्य सै वो, जो धीरज धरकै तेरै जीवन के तेरह सौ पैंतीस दिन के अन्त ताहीं भी पोहचे।
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