22 वोए गूढ़ अर गुप्त बात्तां नै जाहिर करै सै*; वो जाणै सै के अंधियारे म्ह के सै, अर उसकै गैल सदा रोशनी बणी रहवै सै।
22 वोए गूढ़ अर गुप्त बात्तां नै जाहिर करै सै*; वो जाणै सै के अंधियारे म्ह के सै, अर उसकै गैल सदा रोशनी बणी रहवै सै।