1 अपणी जवान्नी के दिनां म्ह अपणे सृजनहार नै याद राख, इसतै पैहला के मुसीबत के दिन अर वे साल आवै, जिन म्ह तू कहवै के मेरा मन इन म्ह न्ही लागदा। 2 इसतै पैहल्या के सूरज अर प्रकाश अर चाँद अर तारा गण अन्धकारमय हो जावैंगे, अर बारिस होण कै बाद बादळ फेर घिर आवै, 3 उस बखत घर के पहरेदार कांम्बैगें, अर ताकतवर झुक जावैंगे, अर पिस्सण-आळी थोड़ी रहण कै कारण काम छोड़ देगी, अर झरोख्यां म्ह तै देखण आळी आँधी हो जावैगी,
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