यहूदियाँ के दुश्मनां का बिरोध करणा
1 जिब सामरिया के शासक सम्बल्लत नै सुण्या के यहूदी माणस शहरपनाह नै बणावै सैं, फेर वो घणा छो म्ह होग्या, अर चिढ़कै यहूदियाँ नै मजाक म्ह उड़ाण लाग्या। 2 वो अपणे भाईयाँ के अर सामरिया की सेना कै स्याम्ही न्यू कहण लाग्या, "वे कमजोर यहूदी के करणा चावै सैं? के वे वो काम अपणे बल तै करैगें? के वे अपणी जगहां मजबूत करैगें? के वे यज्ञ करैगें? के वे आज ए सारै नै निपटा देवैंगे? के वे माट्टी के ढेरां म्ह के जळे होए पत्थरां नै फेर नये सिरे तै बणावैगें?" 3 उसकै धोरै तो अम्मोनी तोबियाह था, अर वो कहण लाग्या, "जो कुछ वे बणावै सैं, जै कोए लोमड़ी भी उसपै चढ़ै, तो वो उनकी बणाई होई पत्थर की शहरपनाह नै तोड़ देवैगा।" 4 हे म्हारे परमेसवर सुण ले, के म्हारा अपमान हो रह्या सै; अर उनका करया होया अपमान उन्हे के सिर पै बोहड़ा दे, अर उननै गुलाम्मी के देश म्ह बोहड़ा दे। 5 अर उनके अधर्म तू ना माफ कर, अर ना उनका पाप तेरे स्याम्ही तै मिटाया जावै; क्यूँके उननै तेरे ताहीं शहरपनाह बणाण आळयां कै स्याम्ही छो दुवाया सै।
6 हमनै शहरपनाह ताहीं बणाया; अर सारी शहरपनाह आध्धी ऊँचाई ताहीं बणगी सै। क्यूँके माणसां का मन उस काम म्ह रोज लाग्या रह्या।