10 फेर महलोन की जनान्नी रूत मोआबिन नै भी मै अपणी घरआळी बणाण खात्तर इस इरादे तै मोल लेऊँ सूं, के मरे होए का नाम उसके खुद के हिस्से पै स्थिर करुँ, कदे इसा ना हो के मरे होए का नाम उसके भाईयाँ म्ह तै अर उसकी जगहां के फाटक तै मिट ज्या; थम आज इस बात के गवाहां ठहरे सो।"