1 "हाय उनपै जो सिय्योन म्ह सुख तै रहवै, अर उनपै जो सामरिया नगर के पहाड़ पै बेफिकर रहवै सै, वे जो सब तै बढ़िया जात्ति म्ह प्रसिद्ध सैं, जिनके धोरै इस्राएल का घरान्नां आवै सै! 2 कलने नगर नै जाकै देक्खो, अर ओड़ै तै हमात नाम के बड़े नगर ताहीं जाओ; फेर पलिश्तियाँ के गत नगर ताहीं जाओ। के वे थारे दो राज्य यहूदा और इस्राएल तै बढ़िया सैं? के उनका देश थारे देश तै कुछ बड़ा सै? 3 थम बुरे दिन नै दूर कर देन्दे, अर उड़दंग की गद्दी नै धोरै ले आओ सो।"
4 "थम हाथी दाँन्द के पलंगां पै लेटदे, अर अपणे-अपणे बिछोणे पै पैर पसारे सोओ सो, अर भेड़-बकरियाँ म्ह तै मेम्ने अर गऊशाळा म्ह तै बाछड़े खाओ हो। 5 थम सारंगी कै गैल गीत गाओ, अर दाऊद की तरियां ढाळ-ढाळ के बाजे बुद्धि तै लिकाड़ो सो; 6 अर कटोरयां म्ह तै दाखमधु पीओ, अर बढ़िया-बढ़िया तेल लगाओ सो, लेकिन यूसुफ पै आणआळी मुसीबत का हाल सुणकै शोकित न्ही होन्दे। 7 इस कारण वे इब गुलाम्मी म्ह पैहला जावैंगे, अर जो पैर पसारे सोवैं थे, उनकी विलासिता जान्दी रहवैगी।"
8 सेनाओं के परमेसवर यहोवा की याए वाणी सै, (परमेसवर यहोवा नै अपणी ए कसम खाकै कह्या सै): "जिसपै याकूब घमण्ड करै सै, उसतै मै घृणा, अर उसके राज-भवनां तै बैर राक्खूँ सूं; अर मै इस नगर नै उन सारया समेत जो उस म्ह सै, दुश्मन के बस म्ह कर दियुँगा।"
9 जै कर किसे घर म्ह दस माणस बचे रहें, तोभी वे मर जावैंगे। 10 जिब किसे का चाचा, जो उसका जळाण आळा हो, उसकी हड्डियाँ ताहीं घर तै लिकाड़ण कै खात्तर ठावैगा, अर जो घर के कुण्यां म्ह हो उसतै कहवैगा, "के तेरे धोरै कोए और सै?" फेर वो कहवैगा, "कोए न्ही;" फेर वो कहवैगा, "चुप रह! हमनै यहोवा का नाम न्ही लेणा चाहिए।"
11 क्यूँके यहोवा के हुकम तै बड़े घर म्ह छेद, अर छोट्टे घर म्ह दरार होवैगी। 12 के घोड़े चट्टान पै दौड़ै? के कोए इसी जगहां म्ह बळधां तै जोत्तै जड़ै थमनै न्याय ताहीं जहर तै, अर धार्मिकता के फळ ताहीं कड़वे फळ म्ह बदल डाल्या सै? 13 थम इसी चीज कै कारण आनन्द करो सो जो बेकार सै; अर कहो सो, "के हम अपणी ए कोशिश तै ताकतवर न्ही होए?" 14 इस करकै सेनाओं के परमेसवर यहोवा की या वाणी सै, "हे इस्राएल के घरान्ने, देख, मै थारे खिलाफ एक इसी जात्ति खड़ी करुँगा, जो हमात की घाटी तै लेकै अराबा की नदी किनारे ताहीं थमनै संकट म्ह गेरैगी।"