1 आमोस नै कह्या, हे इस्राएल के घरान्ने, इस विलाप के गीत के वचन सुण जो मै थारे बारै म्ह कहूँ सूं: 2 "इस्राएल की कुवारी कन्या गिरगी, अर फेर उठ ना सकैगी; वो अपणी ए धरती पै पटक दी गई सै, अर उसका ठाण आळा कोए न्ही।"
3 क्यूँके परमेसवर यहोवा न्यू कहवै सै, "जिस नगर तै हजार लिकड़ै थे, उस म्ह इस्राएल के घरान्ने के सौ ए बचे रहवैंगे, अर जिसतै सौ लिकड़ै थे, उस म्ह दस बचे रहवैंगे।"
4 यहोवा, इस्राएल के घरान्ने तै न्यू कहवै सै, मेरी खोज म्ह लाग्गो, फेर जिन्दा रहोगे। 5 बेतेल म्ह मूर्तिपूजक वेदियाँ की आराधना मत करो, ना गिलगाल के मंदरा म्ह बड़ो, अर ना बेर्शेबा ताहीं जाओ; क्यूँके गिलगाल पक्का गुलाम्मी म्ह जावैगा, अर बेतेल सुन्ना पड़ैगा।
6 यहोवा की खोज करो, फेर जिन्दा रहोगे, न्ही तो वो यूसुफ के घरान्ने पै आग की तरियां भड़कैगा, अर वो उसनै भस्म करैगी, अर बेतेल म्ह कोए उसका बुझाण आळा न्ही होवैगा। 7 हे न्याय के बिगाड़ण आळेयो अर धार्मिकता ताहीं माट्टी म्ह मिलाण आळेयो!
8 जो कचपचिया अर मृगशिरा का बणाण आळा सै, जो घोर अन्धकार ताहीं भोर का प्रकाश बणावै सै, जो दिन नै अन्धकार करकै रात बणा देवै सै, अर समुन्दर का पाणी स्थल कै उप्पर बह्या देवै सै, उसका नाम यहोवा सै। 9 वो तावळी ए ताकत्त वर ताहीं विनाश कर देवै, अर गढ़ का भी सत्यानाश करै सै।
10 जो सभा म्ह उल्हाणा देवै सै उसतै वे बैर राक्खै सैं, अर खरी बात बोलण आळे तै नफरत करै सैं। 11 थम जो कंगालां नै लताड़या करो, अर भेंट कहकै उनतै अन्न खोस लेओ सो, इस करकै जो घर थमनै गढ़े होए पत्थरां के बणाए सैं, उन म्ह रहण न्ही पाओगे; अर जो मनभावणी दाख की बारियाँ थमनै लगाई सैं, उनका दाखमधु ना पीण पाओगे। 12 क्यूँके मै जाणु सूं के थारे पाप भारी सैं। थम धर्मी नै सताओ अर घूस लेओ, अर फाटक म्ह गरीबां का न्याय बिगाड़ो सो। 13 इस कारण जो बुद्धिमान हो, वो इसे बखत चुप रहवै, क्यूँके बखत बुरा सै।
14 हे माणसों, बुराई नै न्ही, भलाई नै ढूँढ़ो, ताके थम जिन्दा रहो; अर थारा यो कहणा सच ठहरै के सेनाओं का परमेसवर यहोवा थारे गैल सै। 15 बुराई तै बैर अर भलाई तै प्यार राक्खो, अर फाटक म्ह न्याय नै मजबूत करो; के बेरा सेनाओं का परमेसवर यहोवा यूसुफ के बचे होया पै अनुग्रह कर दे।
16 इस कारण सेनाओं का परमेसवर, प्रभु यहोवा न्यू कहवै सै: "सारे चौकां म्ह रोणा-पीटणा होवैगा; अर सारी सड़कां पै माणस हाय, हाय, करैंगे! वे किसानां नै शोक करण कै खात्तर, अर जो माणस विलाप करण म्ह निपुण सैं, उननै रोण-पीटण नै बुलावैंगे। 17 अर सारी दाख की बारियाँ म्ह रोणा-पीटणा होवैगा," क्यूँके यहोवा न्यू कहवै सै, "मै थारे बीच म्ह तै होकै जाऊँगा।"
18 एक और बार आमोस नै कह्या थारे पै, जो यहोवा के न्याय के दिन की इच्छा करो सो! यहोवा के दिन तै थारा के फायदा होवैगा? वो तो उजियाले का न्ही, अंधियारे का दिन होवैगा। 19 जिस तरियां कोए शेर तै भाज्जै अर उसनै भालू मिलै; या घर म्ह आकै दीवार पै हाथ टेकै अर नाग उसनै डसै। 20 के यो सच न्ही सै के यहोवा का दिन उजियाले का न्ही, बलके अंधियारे ए का होवैगा? हाँ, इसे घोर अन्धकार का जिस म्ह कुछ भी चमक ना हो।
21 यहोवा कहवै सै, "मै थारे पर्वां तै बैर राक्खूँ, अर उननै निकम्मा जाणु सूं, अर थारी महासभा तै मै खुश न्ही। 22 चाहे थम मेरे खात्तर होमबलि अर अन्नबलि चढ़ाओ, तोभी मै खुश न्ही होऊँगा, अर थारे पाळे होए पशुआं के मेलबलियां की और ना देखूँगा। 23 अपणे गीतां का शोर-सराबा मेरे तै दूर करो; थारी सारंगियाँ का सुर मै न्ही सुणूँगा। 24 लेकिन न्याय नै नदी की तरियां, अर धार्मिकता ताहीं महानद की तरियां बहण द्यो।"
25 "हे इस्राएल के माणसों, थम जंगळ म्ह चाळीस साल ताहीं पशुबलि अर अन्नबलि के मेरे ताहीं ए चढ़ान्दे रहे? 26 न्ही, थम तो अपणे राजा का तम्बू, अर अपणी मूरतां की चरणपीठ, अर अपणे देवता का तारा लिए फिरदे रहे, जिन ताहीं थमनै अपणे खात्तर बणाया सै। 27 इस करकै मै थमनै दमिश्क के उस पार गुलाम्मी म्ह कर दियुँगा, सेनाओं के परमेसवर यहोवा का योए वचन सै।"