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यशायाह 39

िजकिखत

1 उस बखत बलदमरदक बलद, ा, उसनिजकिअर िणकउसकिअर ेंे। 2 इनतिजकिअपणअनमपदां भणअर ाँी, ्‍ा, गनध-दरव, बढ़िअर अपणअनमपदां भणां ो-ी, सब उन ीं ििजकिभवन अर भर इसरहउसनउनतिो। 3 यशनबिजकिा, "णस कहगे, अर िआए े?" िजकिकहा, "िआए े।" 4 यशा, "भवन उनने-39:4 तेरे भवन म्ह उननै के-के देख्या सै यो घणा हो सकै सै के हिजकिय्याह नै उन ताहीं अपणे राज्य का खजान्‍ना दिखाया था यरुशलेम म्ह जो सारे जाणै थे। इसा सच सरेआम ध्यान खिच्‍चण का कारण हो सकै सै अर माणसां के जरिये कारण की खोज पैदा कर सकै सै।?" िजकिकहा, "भवन ै, सब उननै; भणां इसमन्‍उनतिो।"

5 यशिजकिकहा, "यहवचन े: 6 इसिआण आळैं, िभवन अर आज िीं रखधरयभणां ैं, ीं उठिा; यहकहवबची। 7 नदों, उन कईयाँ ैंे; अर बणकजभवन रहवैंकरांे।" 8 िजकियशकहा, "यहवचन तन्‍कहभलै।" उसनकहा, "िां ि अर सच्‍बणरहवी।"

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