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यशायाह 54

सदि कर

1 यह54:1 भजन. 113:9; गला. 4:27 यरशलकहवै, "ाँ, े-ऊलजयजयककर; िसनजच्‍ि, गळलकजयजयककर अर ! ूँळक गण ळकां घणैंे, यहवचन ै। 2 अपणतमजगहां ़ी कर, अर पट करैं; , रसिाँ ीं अर ूँटयीं मजबकर3 ूँआसै-ी, अर नदि-ि अधिअर उजड़े नगरां ीं बसा।"

4 "डरै, ूँउमी; घबरै, ूँशरिअर उदी; ूँअपणजवशर54:4 तू अपणी जवानी की शर्म भूल जावैगी भविष्य की घणी बहुतायत अर वैभव म्ह उनकी पुराणे बखत के इतिहास की शर्म की बात्तां नै सब भूलाई जावैंगी।, अर अपणिधवपन बदनकरी। 5 ूँकरपति ै, उसकयहै; अर इसएल पविपरमसवर ़ाआळै, धरतपरमसवर ा। 6 ूँयहीं इसै, ्‍अर मन ुःिअर जव्‍जन्‍ो, परमसवर वचन ै। 7 पलभर तर54:7 पलभर कै ए खात्तर उरै जरुर बाबेल की बन्धुआई की प्रजा के बारै म्ह सै, जो साफ-साफ रूप तै परमेसवर के जरिये भूलाए होए जाणे जावैं थे। मन्‍ीं िा, पर इब बड़ी दयकरकीं ूँा। 8 लहर आकमन्‍पलभर तर ुँिा, पर इब अननकरदयकरुँा, ़ाणआळयहवचन ै। 9 नजर बखत जल-परलय तरिां ै; ूँिमन्‍कसम बखत जल-परलय धरती, उसतरिां मन्‍कसम कदकरुँअर ीं धमका। 10 पहहट अर पह़िाँ टळ ैं, करकदहटी, अर ि आळकरटळा, यहा, दयकरै, उसकवचन ै।"

नई यरशलनगर

11 "ुःिी, सतअर िीं ि िी, , ीं मतपतथरां पच्‍बणिा, अर ींलमणि ूँा। 12 कलश िाँ ै, टक लड़िां अर ां मनहर रतां बणा। 13 54:13 नीति. 16:4, . 9:22 यहिैंे, अर उननबड़ी ि िी। 14 िकतजरिमजबी; बची, ूँीं डरणपड़ैा; अर भयभबची, ूँभय रण आवा। 15 , णस लगैंे, पर ओडी; ितनिलगैंरण िैंे। 16 , एक यलआग ोंककइसकतर हथिबणै, िरजै। उजतर ओडएक करण आळिरजगयै। 17 ितनहथिकसतर बणैंे, उन सफल ा, अर ितनणस दई लगैं उन रया। यहां िा, अर रण धरहरें, यहै।"

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