1 यहोवा यरुशलेम तै न्यू कहवै सै, "हे बाँझ, तू जो बे-ऊलाद सै जयजयकार कर; तू जिसनै जच्चा की जिसी पीड़ न्ही होई, गळा खोलकै जयजयकार कर अर पुकार! क्यूँके छोड्डी होई के बाळक सुहागण के बाळकां तै घणे होवैंगे, यहोवा का योए वचन सै। 2 अपणे तम्बू की जगहां चौड़ी कर, अर तेरे डेरे के पट लाम्बे करे जावैं; हाथ नै ना रोक, रस्सियाँ ताहीं लाम्बी अर खूँटया ताहीं मजबूत कर। 3 क्यूँके तू आस्सै-पास्सै फैलैगी, अर तेरा खानदान जात्ति-जात्ति का अधिकारी होवैगा अर उजड़े होए नगरां ताहीं फेर तै बसावैगा।"
4 "ना डरै, क्यूँके तेरी उम्मीद फेर न्ही टूट्टैगी; ना घबरावै, क्यूँके तू फेर शर्मिन्दा न्ही होवैगी अर तेरै पै उदासी ना छावैगी; क्यूँके तू अपणी जवानी की शर्म भूल जावैगी, अर अपणे विधवापन की बदनाम्मी नै फेर याद न्ही करैगी। 5 क्यूँके तेरा कर्ता तेरा पति सै, उसका नाम सेनाओं का यहोवा सै; अर इस्राएल का पवित्र परमेसवर तेरा छुड़ाण आळा सै, वो सारी धरती का भी परमेसवर कुह्वावैगा। 6 क्यूँके यहोवा नै तेरे ताहीं इसा बुलाया सै, मान्नो तू छोड्डी होई अर मन की दुःखिया अर जवान्नी की छोड्डी होई जनान्नी हो, तेरे परमेसवर का योए वचन सै। 7 पलभर कै ए खात्तर मन्नै तेरे ताहीं छोड़ दिया था, पर इब बड़ी दया करकै मै फेर तेरे ताहीं राख ल्यूँगा। 8 छो की लहर म्ह आकै मन्नै पलभर कै खात्तर तेरै तै मुँह छिपाया था, पर इब अनन्त करुणा तै मै तेरै पै दया करुँगा, तेरे छुड़ाणआळे यहोवा का योए वचन सै। 9 यो मेरी नजर म्ह नूह के बखत के जल-प्रलय की तरियां सै; क्यूँके जिसी मन्नै कसम खाई थी के नूह के बखत के जल-प्रलय तै धरती फेर न्ही डूबैगी, उस्से तरियां मन्नै या भी कसम खाई सै के फेर कदे तेरै पै छो न्ही करुँगा अर ना तेरे ताहीं धमकी देऊँगा। 10 चाहे पहाड़ हट जावै अर पहाड़ियाँ टळ जावैं, तोभी मेरी करुणा तेरै पै तै कदे न्ही हटैगी, अर मेरा शान्ति देण आळा करार न्ही टळैगा, यहोवा, जो तेरै पै दया करै सै, उसका योए वचन सै।"
11 "हे दुःखियारी, तू जो आँधी की सताई सै अर जिस ताहीं शान्ति न्ही मिली, सुण, मै तेरै ताहीं कीमती पत्थरां तै पच्चीकारी दोबारा बणाकै बिठाऊँगा, अर तेरी नींव नीलमणि तै डालूँगा। 12 तेरे कलश मै माणिक्याँ तै, तेरे फाटक लालड़ियां तै अर तेरी सारी सीमा की दीवारां नै मनोहर रत्नां तै बणाऊँगा। 13 तेरे, रोम. 9:22 सारे छोरे यहोवा के सिखाए होए होवैंगे, अर उननै बड़ी शान्ति मिलैगी। 14 तू धार्मिकता कै जरिये मजबूत होवैगी; तू अंधेर तै बचैगी, क्यूँके तेरे ताहीं डरणा न्ही पड़ैगा; अर तू भयभीत होण तै बचैगी, क्यूँके भय का कारण तेरे धोरै ना आवैगा। 15 सुण, माणस भीड़ लगावैंगे, पर मेरी ओड़ तै न्ही; जितने तेरै खिलाफ भीड़ लगावैंगे वे तेरै कारण गिरैंगे। 16 सुण, एक लोहार कोयले की आग धोंककै इसकै खात्तर हथियार बणावै सै, वो मेरा ए सिरज्या होया सै। उजाड़ण खात्तर भी मेरी ओड़ तै एक नाश करण आळा सिरज्या गया सै। 17 जितने हथियार तेरे नुकसान कै खात्तर बणाए जावैंगे, उन म्ह तै कोए भी सफल न्ही होवैगा, अर जितने माणस मुद्दई होकै तेरै पै दोष लगावैं उन सारया तै तू जीत जावैगा। यहोवा के दास्सां का योए हिस्सा होवैगा, अर वे मेरै ए कारण धर्मी ठैहरैगें, यहोवा की याए वाणी सै।"