1 दर्शन की तराई कै बारै म्ह भारी वचन। थारै के होग्या के थम सारे के सारे छात्तां पै चढ़गे सो, 2 हे शोर-सराबा अर हुड़दंग तै भरी प्रसन्न नगरी? तेरै म्ह जो मारे गए सैं वे ना तो तलवार तै अर ना लड़ाई म्ह मारे गए सैं। 3 तेरे सारे शासक एक साथ भाजगे अर बिना धनुष के कैदी बणाए गये सैं। तेरे जितने बाकी पाए गये वे एक साथ बाँधे गये, फेर भी वे दूर भाजे थे। 4 इस करकै मन्नै कह्या, "मेरी और तै मुँह फेर ल्यो के मै बिलख-बिलख कै रोऊँ; मेरे नगर के सत्यानाश होण कै शोक म्ह मेरे ताहीं शान्ति देण की कोशिश ना करो।"
5 क्यूँके सेनाओं के प्रभु यहोवा का ठहराया होया दिन होगा, जिब दर्शन की तराई म्ह शोर-सराबा अर रोंद्या जाणा अर बेचैनी होवैगी; शहरपनाह म्ह सुरंग लगाई जावैगी अर दुहाई का शब्द पहाड़ां ताहीं पोहचैगा। 6 एलाम पैदलां के दल अर सवारां सुधा तरकश बाँधे होए सै, अर कीर शहर ढाल खोल्ले होए सै। 7 तेरी बढ़िया-बढ़िया तराई रथां तै भरी होई होवैगी अर सवार फाटक कै स्याम्ही कतार बाँधैंगे। 8 उसनै यहूदा का घूँघट खोल दिया सै। उस दिन तन्नै वन नाम के भवन के अस्त्र-शस्त्र ताहीं याद करया,
9 अर तन्नै दाऊदपुर की शहरपनाह की दरारां ताहीं देख्या के वे भोत सैं, अर तन्नै निचले जलकुण्ड के पाणी ताहीं कठ्ठा करया। 10 अर यरुशलेम के घरां ताहीं गिणकै शहरपनाह के मजबूत करण कै खात्तर घरां ताहीं गेर दिया। 11 तन्नै दोन्नु दीवारां कै बीच पुराणे जलकुण्ड के पाणी कै खात्तर एक कुण्ड खोद्या। पर तन्नै उसके कर्ता ताहीं याद न्ही करया, जिसनै पुराणे बखत तै उस ताहीं ठहरा राक्खा था, अर ना परमेसवर की और तन्नै नजर करी।
12 उस बखत सेनाओं के प्रभु यहोवा नै रोण-पीटण, सिर मुँण्डाण अर टाट पैहरण कै खात्तर कह्या था; 13 पर के देख्या मै इफिसुस नगर म्ह बड़ी तै बड़ी मुसीबतां म्ह तै गुजरा सूं, जो जंगली-जानवरां की तरियां मेरा बिरोध करै सै, तो मन्नै के फायदा होया? जै मुर्दे जिन्दे न्ही करे जावैंगे, तो हम कह सका सां, के "आओ, खावां-पीवां, क्यूँके काल तो मरणा ए सै।" के खुशी अर आनन्द मनाया जाण लागरया सै, गां-बळध का घात अर भेड़-बकरी का वध करया जाण लागरया सै, माँस खाया अर दाखमधु पिया जाण लागरया सै। अर कहवैं सैं, "आओ खावां-पीवां, क्यूँके कल तो हमनै मरणा सै।" 14 सेनाओं के यहोवा नै मेरे कान म्ह कह्या अर अपणे मन की बात जाहिर करी, "जरुर थमनै माणसां के इस अधर्म का किमे भी पछतावा थारी मौत तक ना हो सकैगा," सेनाओं के प्रभु यहोवा का योए कहणा सै।
15 सेनाओं का प्रभु यहोवा न्यू कहवै सै, "शेबना नाम के उस भण्डारी कै धोरै जो राजघरान्ने के काम पै ठहराया गया सै जाकै कह, 16 ‘उरै तू के करै सै? अर उरै तेरा कौण सै के तन्नै अपणी कब्र उरै खुदवाई सै? तू अपणी कब्र ऊँच्ची जगहां म्ह खुदवान्दा अर अपणे रहण की जगहां चट्टान म्ह खुदवावै सै? 17 देख, यहोवा तेरे ताहीं बड़ी शक्ति तै पकड़कै घणा दूर फेंक देवैगा। 18 यहोवा तेरे ताहीं मरोड़कै गेन्द की तरियां लाम्बे-चौड़े देश म्ह फेंक देवैगा; हे अपणे माल्लिक के घराने ताहीं शर्मिन्दा करण आळे ओड़ै तू मरैगा अर तेरे वैभव के रथ ओड़ैए रह जावैंगे। 19 मै तेरे ताहीं तेरी जगहां पै तै धकेल देऊँगा, अर तू अपणे पद तै तार दिया जावैगा। 20 उस बखत मै हिल्किय्याह के बेट्टे अपणे दास एलयाकीम ताहीं बुलाकै, उसनै तेरा अंगरखा पिराऊँगा, 21 अर उसकी कमर म्ह राजसी कमरबन्द कसकै बाँधूँगा, अर तेरी प्रभुता उसके हाथ म्ह देऊँगा। अर वो यरुशलेम के रहण अर यहूदा के घरान्ने का पिता ठहरैगा। 22 मै दाऊद के कुण्बे की कुँजी उसके कंधे पै राखूँगा, अर वो खोलैगा अर कोए बन्द ना कर सकैगा; वो बन्द करैगा अर कोए खोल ना सकैगा। 23 अर मै उस ताहीं मजबूत स्थान म्ह खूँटी की तरियां गाड़ूँगा, अर वो अपणे पिता के घराने कै खात्तर वैभव का कारण होवैगा। 24 अर उसके पिता तै घराने का सारा वैभव, वंश अर औलाद, सारे छोट्टे-छोट्टे बरतन, के कटोरे के सुराहियाँ, सारी उसपै टाँगी जावैंगी। 25 सेनाओं के यहोवा की या वाणी सै के उस बखत वो खूँटी जो मजबूत स्थान म्ह गाड्डी गई थी, वो ढील्ली हो जावैगी, अर काटकै गिराई जावैगी; अर उसपै का बोझ गिर जावैगा, क्यूँके यहोवा नै न्यू कह्या सै।’"