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यशायाह 26

उदएक

1 आब िबखत यहां ा, "एक मजबनगर ै; उदतर उसकशहरपनअर गढीं ठहरकरै। 2 शहर टकां ्‍सच्‍लन करण आळएक धररवकरै। 3 यह26:3 हे यहोवा फिलि. 4:7 परमसवर ि, णस समझ परै, मन अर िां मसरकिी। िसकमन रज धरैं, उसकि िजत करै, ूँभरै। 4 यहसदभर, ूँरभयहसनतन चटै। 5 ्‍पदआळै, नगर ्‍बसउस ीं ्‍कर ै। उसनधरतििै। 6 ाँां ै, बलकगरां ां ोंा।"

7 धरयहसच्‍ै; सच्‍ै, धरयहअगकरै। 8 यहा, हम णस खदआए ां; ां लसबणरहवै। 9 बखत लसकरुँ ूं, मन यतीं ूँै। ूँिधरतरगट ैं ैं, जगत रहण आळिकतैं। 10 परमसवर दय26:10 दुष्ट पै दया सजा देणा जरूरी सै के दुष्ट आदमी धार्मिकता की राह पै आ जावै। करपर िकता; धरकरा, अर यहउसनसमझ पड़ैा।

11 यह26:11 हे यहोवा इब्रा. 10:27. ाँ, परमसवर िआवा, अर अपणििाँ कर ा, अर आळै।, बढै, पर खदे। पर ें ीं रजतर िजळण ै, अर शरिैंे। 12 आग भसैंे। यहा, तर ि ठहरा, हमनिकरयउस ीं तन्‍तर करयै। 13 परमसवर यहा, िऔर ्‍िरभकरे, पर हम िकरांे। 14 ्‍िमरगैं, कदिैंे; उन ीं मरघणि, उठण े; तन्‍उनकिकरकउन ीं इसकरयआवैंे। 15 पर तन्‍ि ीं बढ़ाा; यहा, तन्‍ि ीं बढ़ाै; तन्‍अपणमहििअर यहीं तन्‍बढ़ाै।

16 यहा, ुःीं करैं े, िउननफटकदबआवअपणमन िकरे। 17 ि26:17 जिस भजन. 48:6 ओड़ै पकउन ीं पकडा, अर जच्‍तरिां उनकदरा। तरिां गरभवतजन्‍मण बखत अर दररण ि्‍उठै, हम णस ी, यहा, उसतरिां ां। 18 हम गरभवत, हम ै, हमन्‍हवीं जनिा।26:18 म्हारी कोशिश सब बेकार रही। हमनतर उदकरया, अर जगत रहण आळ19 मरणस िैंे, उठ खड़े ैंे। बसण आळो, जयजयककरो! ूँओस ि ै, अर धरतदयां हड़ा ी।26:19 धरती मुर्दयां नै बोहड़ा देवैगी। यानिके पुनरुत्थान के दिन धरती अपणे मृतक खड़े कर देवैगी के बाबेल म्ह परमेसवर के माणस फेर जिन्दा हो जावैंगे।

अर टक

20 णसों, आओ, अपणी-अपणठड़ी रवकरकि़ां बनकरो; ़ी ीं ितक तब ीं अपणिो। 21 ूँो, यहधरतिदयअधरसजतर अपणजगहां चलआवै, अर धरतअपणिकरअर करऔर घणिी।

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