1 यहोवा न्यू कहवै सै, "गळा खोलकै पुकार, कुछ ना रख छोड़, नरसिंगे के जिसा ऊँच्चा शब्द कर; मेरी इजराइल की प्रजा नै उसका अपराध यानिके याकूब के घरान्ने नै उसका पाप बता दे। 2 वे हर दिन मेरी आराधना करण खात्तर मेरै धोरै आवैं अर मेरी चाल जाणण की इच्छा इसी राक्खै सैं मान्नो वे धर्मी माणस सैं जिननै अपणे परमेसवर के नियमां ताहीं न्ही टाळया; वे मेरे ताहीं धर्म के नियम पूच्छै अर परमेसवर कै धोरै आण तै खुश होवै सैं। 3 वो लोग न्यू कहवै सैं, ‘के कारण सै के हमनै उपवास राख्या, पर तन्नै इसकी सुधि न्ही ली? हमनै दुःख ठाया, पर तन्नै कुछ ध्यान न्ही दिया?’ यहोवा उनतै न्यू कहवै सै, सुणो, उपवास के दिन थम अपणी ए इच्छा पूरी करो सों अर अपणे सेवकां तै मुश्किल काम कराओ सों। 4 सुणो, थारे उपवास का फळ यो होवै सै के थम आप्पस म्ह लड़ो अर झगड़ो अर बुराई तै घूँसे मारो सों। जिसा उपवास थम आजकाल राक्खों सों, उसतै थारी प्रार्थना परमेसवर नै सुणाई न्ही देवैगी। 5 जिस उपवास तै मै खुश होऊँ सूं यानिके जिस म्ह माणस खुद नै दीन करै, के थम इस तरियां करो सों? के सिर नै झाऊ की तरियां झुकाणा, अपणे नीच्चै टाट बिछाणा, अर राख फैलाण नै ए थम उपवास अर यहोवा नै खुश करण का दिन कहों सों?"
6 "जिस उपवास तै मै खुश होऊँ सूं, वो के यो न्ही, के, अन्याय तै बणाये होए दास्सां, अर अंधेर सहण आळयां का जूआ तोड़कै उननै छुड़ा लेणा, अर, सारे जूयां ताहीं टुकड़े-टुकड़े कर देणा? 7 के वो यो न्ही सै के अपणी रोट्टी भूख्यां ताहीं बाँट देणा, अनाथ अर मारे-मारे फिरदे होया नै अपणे घरां ले आणा, किसे नै नंगा देखकै कपड़े पिहराणा, अर अपणे जात्ति भाईयाँ तै खुद ताहीं ना छिपाणा? 8 फेर तेरा चाँदणा पौ पाटण की तरियां चमकैगा, अर तू तावळा चंगा हो जावैगा; तेरी धार्मिकता तेरै आग्गै-आग्गै चाल्लैगी, यहोवा का तेज तेरै पाच्छै हिफाजत करदा चाल्लैगा। 9 फेर तू पुकारैगा अर यहोवा उत्तर देवैगा; तू दुहाई देवैगा अर वो कहवैगा, ‘मै उरै सूं।’ जै तू अंधेर करणा अर उंगळी ठाणा, अर, बुरी बात बोलणा छोड़ दे, 10 उदारता तै भूखे की मदद करै अर दीन दुःखियाँ नै सन्तुष्ट करै, फेर अंधियारे म्ह तेरा चाँदणा चमकैगा, अर तेरा घोर अन्धकार दोपहर का जिसा उजियाळा हो जावैगा। 11 यहोवा तन्नै लगातार लिये चाल्लैगा, अर अकाळ के बखत तेरे ताहीं छिकाए राक्खैगा अर तेरी हाड्डियाँ नै हरी-भरी करैगा; अर तू सिंची होई बारी अर इसे चोए की तरियां होवैगा जिसका पाणी कदे भी न्ही सुखदा। 12 तेरे खानदान के माणस लाम्बे बखत की उजड़ी होई जगहां नै फेर बसावैंगे; तू पीढ़ी-पीढ़ी की पड़ी होई नींव पै घर ठावैगा; तेरा नाम टूट्टे होए बाड़े का सुधारणियाँ अर रास्तयां का ठीक करण आळा पड़ैगा।"
13 "जै तू विश्रामदिन नै अशुद्ध ना करै यानिके मेरे उस पवित्र दिन म्ह अपणी इच्छा पूरी करण की कोशिश ना करै, अर विश्रामदिन नै आनन्द का दिन अर यहोवा का पवित्र करया होया दिन समझकै मान्नै; जै तू उसका सम्मान करकै उस दिन अपणी राह पै ना चाल्लै, अपणी इच्छा पूरी ना करै, अर अपणी ए बात ना बोल्लै, 14 तो तू यहोवा कै कारण सुखी होवैगा, अर मै तेरे ताहीं देश की ऊँच्ची जगहां पै चाल्लण देऊँगा; मै तेरे मूलपुरुष याकूब के हिस्से की फसल म्ह तै तेरे ताहीं खुवाऊँगा, क्यूँके यहोवा ए कै मुँह तै यो वचन लिकड्या सै।"