1 सुणो, पक्की बात सै के यहोवा का हाथ इसा छोट्टा न्ही होया के उद्धार ना कर सकै, ना वो इसा बैहरा होया सै के सुण ना सकै; 2 पर थारे अधर्म के काम्मां नै थारे ताहीं थारे परमेसवर तै अलग कर दिया सै, अर थारे पाप कै कारण उसका मुँह थारे तै इसा छिप्या सै के वो थारी प्रार्थना न्ही सुणदा। 3 क्यूँके थारे हाथ खून तै अर थारी आँगळियाँ अधर्म के काम्मां तै अपवित्र होगी सैं, थारे मुँह तै तो झूठ अर थारी जीभ तै कुटिल बात लिकड़ी सैं। 4 कोए धर्म कै गैल न्याय न्ही करदा, ना कोए सच्चाई तै मुकद्दमा लड़ै सै; वे झूठ पै भरोस्सा राक्खै सैं अर झूठ्ठी बात गढ़ै सैं; उस नै मान्नो हुड़दंग का गर्भ रहवै, अर वे अनर्थ नै जन्म देवै सैं। 5 वे नाग्गण के अण्डे सेवै अर मकड़ी के जाळे बणावै सैं; जो कोए उनके अण्डे खावै वो मर जावै सै, अर जिब कोए एक नै फोड़ै फेर उस म्ह तै सपोला लिकड़ै सै। 6 उनके जाळे कपड़े का काम ना देवैंगे, ना वे अपणे काम्मां तै खुद नै ढक सकैगें। क्यूँके उनके काम अनर्थ के ए होवै सैं, अर उनके हाथ्थां तै हुड़दंग का काम होवै सै। 7 वे बुराई करण नै दौड़ै सैं, अर निर्दोष का खून करण खात्तर सदा त्यार रहवै सैं; उनकी योजना बेकार सैं, उजाड़ अर विनाश ए उनके राह म्ह सैं। 8 शान्ति का राह वे जाण्दे ए कोनी; अर ना उनके बरताव म्ह न्याय सै; उनके रास्ते टेढ़े सैं, जो कोए उनपै चाल्लै वो शान्ति न्ही पावैगा।
9 लोग न्यू कहवै सै इस कारण न्याय म्हारे तै दूर सै, अर धर्म म्हारे धोरै कोनी आवै; हम उजियाळे की बाट तो देक्खा सां, पर, देक्खों अंधियारा ए बण्या रहवै सै, हम परमेसवर के न्याय की उम्मीद तो लगावां सां, पर, घोर अन्धकार म्ह ए चाल्लां सां। 10 हम आंध्याँ की तरियां दीवार टटोळा सां, हाँ, हम बिना आँख के माणसां की तरियां टटोळा सां; हम दिन दोपहर रात की तरियां ठोक्कर खावां सां, हट्टे-कट्यां कै बीच म्ह हम मुर्दयां की तरियां सां। 11 हम सारे के सारे रीछां की तरियां चिल्लावां सां अर पिण्डुकां की तरियां च्यूं-च्यूं करां सां; हम न्याय की बाट तो देक्खां सां, पर वो किते कोनी; अर उद्धार की बाट देक्खां सां पर वो म्हारे तै दूर ए रहवै सै। 12 क्यूँके म्हारे अपराध तेरै स्याम्ही भोत होए सैं, म्हारे पाप म्हारै खिलाफ गवाही देण लागरे सैं; म्हारे अपराध म्हारे गैल सैं अर हम अपणे अधर्म के काम जाणा सां: 13 हमनै यहोवा का अपराध करया सै, हम उसतै मुकरगे अर अपणे परमेसवर कै पाच्छै चालणा छोड़ दिया, हम अंधेर करण लाग्गे अर उल्ट-फेर की बात कही, हमनै झूठ्ठी बात मन म्ह गढ़ी अर कही भी सैं। 14 न्याय तो पाच्छै हटाया गया अर धर्म दूर खड़या रहग्या; सच्चाई बजार म्ह गिर पड़ी, अर सिधाई बड़ण न्ही पान्दी। 15 हाँ, सच्चाई खो गई, अर जो बुराई तै भाज्जै सै वो शिकार हो जावै सै। यो देखकै यहोवा नै बुरा मान्या, क्यूँके न्याय जान्दा रहया।
16 उसनै देख्या के कोए भी माणस न्ही, अर इसतै अचम्भा करया के कोए बिनती करण आळा कोनी; फेर उसनै अपणे ए भुजबल तै उद्धार करया, अर अपणे धर्मी होण कै कारण वो सम्भळ ग्या। 17 यहोवा नै धार्मिकता ताहीं झिलम की तरियां पैहर लिया, अर उसके सिर पै उद्धार का टोप धरया गया; उसनै बदला लेण के कपड़े धारण करे, अर जळजळाहट ताहीं बागे की तरियां पैहर लिया सै। 18 उनके कर्मां कै मुताबिक वो उननै फळ देवैगा, अपणे धोक्खेबाजां पै वो अपणा गुस्सा भड़कावैगा अर अपणे बैरियाँ नै उनकी कमाई देवैगा; वो द्वीपवासियाँ नै भी उनकी कमाई तै भर देवैगा। 19 फेर पश्चिम की और माणस यहोवा के नाम का, अर पूर्व की और उसकी महिमा का भय मान्नैगें; क्यूँके जिब दुश्मन महानद की तरियां चढ़ाई करैंगे फेर यहोवा का आत्मा उसकै खिलाफ झण्डा खड्या करैगा।
20 यहोवा अपणे लोगां तै न्यू कहवै सै, "याकूब म्ह जो अपराध तै मन फिरावै सैं उनके खात्तर सिय्योन म्ह एक छुड़ाण आळा आवैगा," यहोवा की योए वाणी सै। 21 यहोवा न्यू कहवै सै, "जो करार मन्नै उनतै करया सै वो यो सै, के मेरा आत्मा तेरै पै ठहरया सै, अर अपणे वचन जो मन्नै तेरे मुँह म्ह पाए सैं इब तै लेकै सदा ताहीं वे तेरे मुँह तै, अर तेरे बेट्याँ अर पोत्यां के मुँह तै भी कदे न्ही हटैंगे।"