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यशायाह 47

पतन

1 यहकहवै, ुँ47:1 कसदियो की बेट्टी पूरी तरियां बाबेल देश के बारे मै बात करण का एक तरीका सै, उतर अर ; कसदिाँ ििंसन धरत! ूँइब मल अर ी। 2 ्‍आटि, अपणूँघट हटअर घरसमअर उघ़ी ांाँ नदिाँ कर3 नगनतउघ़ी 47:3 तेरी नग्नता उघाड़ी जावैगी यो नगर के सर्वनाश की बुरी हालत नै दिखावै सै। उसका घमण्ड खतम हो जावैगा अर उसकी हालत इसी होवैगी के उसके बासिन्दे बेजती अर शर्म तै भर जावैंगे। अर शरिी। बदलअर िणस ़ूँा।

4 टकआळयहअर इसएल पविपरमसवर ै।

5 कसदिाँ ी, पचरह अर िा; ूँइब य-रमही। 6 मन्‍अपणरजअपणीं अपविठहरअर बस कर िा; तन्‍उनपदयकरी; ां तन्‍अपणधर िा। 7 तन्‍कहा, "सदमहबणरहूँी," इस करकतन्‍अपणमन इन ां िकरयअर उनकनतिा।

8 इस47:8 सप. 2:15; प्रका. 18:7; सप. 2:15; प्रका. 18:7 करक, ग-रउळझिडर रहवअर मन कहव"ूं, और ीं सरी; िधवतरिां ूँअर ल-बच्‍िैंे।" 9 47:9 प्रका. 18:8,23, ्‍ुःिळकां रहणअर िधवा, णचक एकिआण पड़ैें। त-सू-अर ी-र-मां अपणआण पड़ैें।

10 तन्‍अपणटतभरा,47:10 तन्‍नै अपणी दुष्टता पै भरोस्सा राख्या, उरै बेसक, बुराई का मतलब घमण्ड सै यानिके उसनै यो सोच्या था के वो इनके जरिये दुसरे देशां पै अपणी श्रेष्ठता अर प्रभुता बणाए राक्खैगा। तन्‍कहा, "ीं खदा;" ि अर ीं बहकअर तन्‍अपणमन कहा, "ूं और िसरी।" 11 पर इसगति िसकणदी, अर इसबत पड़ैयशिकरकउसकिरण कर सकी; णचक ि, आण पड़ैिसकीं ी।

12 अपणर-मअर त-सां ै, िनकतन्‍ळकपण अभकरयै, इसतमा, सकउनतयदसकउनकिरह सकै। 13 ि करदे-करदथकगै; इब िनकषतां अर नये-नयाँखकआळबतैं, खड़े तन्‍उन ां बचघटैंी।

14 , ितरिां आग भसैंे; अपणबचसकें। आग ्‍कण तर ी, अर इसिसकसकै! 15 िनकतर हनत करदआई सब तर उसैंे, अर जव्‍पहर करदआए ैं, उन हर एक अपणी-अपणिओडचलैंे; बचआळरहवा।

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