1 यहोवा याकूब पै दया करैगा, अर इस्राएल के लोग्गां नै फेर अपणा कै, उन्हे के देश म्ह बसावैगा, अर परदेशी उनतै मिल जावैंगे अर अपणे-अपणे ताहीं याकूब के घरान्ने तै मिला लेंगे। 2 देश-देश के माणस उननै यहोवा की दी होई जगहां म्ह पोहचावैंगे जो, अर इस्राएल का घरान्नां यहोवा की धरती पै उनका अधिकारी होकै उननै दास अर दासियाँ बणावैगा; क्यूँके वे अपणी गुलाम्मी म्ह ले जाण आळयां ताहीं कैदी बणावैगें, अर जो उनपै अत्याचार करैं थे उनपै वे शासन करैंगे।
3 जिस दिन यहोवा तेरे ताहीं तेरे सन्ताप अर घबराहट तै, अर उस मुश्किल मेहनत तै जो तेरै तै ली गई आराम देवैगा, 4 उस दिन तू बाबेल के राजा पै यो गाणा गाकै अर तान्ना मारकै कहवैगा, "मेहनत कराण आळा किस तरियां नाश होग्या सै, सुनहरे मन्दरां तै भरी नगरी किसी नाश होगी सै! 5 यहोवा नै दुष्टां के सोंटे ताहीं अर अन्याय तै शासन करण आळयां के लठ ताहीं तोड़ दिया सै, 6 जिसतै वे माणसां ताहीं लगातार छो तै मारदे रहवैं थे, अर जात्ति-जात्ति पै छो तै प्रभुता करदे अर लगातार उनकै पाच्छै पड़े रहवैं थे। 7 इब सारे माणसां ताहीं आराम मिल्या सै, वो चैन तै सै; माणस ऊँच्ची आवाज तै गा उठे सैं। 8 सनोवर अर लबानोन के देवदार भी तेरै पै आनन्द करकै कहवैं सैं, ‘जिब तै तू गिराया गया जिब तै कोए हमनै काटण नै न्ही आया।’ 9 पाताळ कै तळै अधोलोक म्ह तेरै तै मिलण कै खात्तर हलचल हो रह्यी सै; वो तेरे खात्तर मुर्दयां ताहीं यानिके धरती के सारे सरदारां ताहीं जगावै सै, अर वो जात्ति-जात्ति तै सारे राजयां ताहीं उनके सिंहासन पै तै ठा खड़या करै सै। 10 वे सारे तेरे ताहीं चिल्लावैंगे, ‘के तू भी म्हारी तरियां कमजोर होग्या सै? के तू म्हारी तरियां ए बणग्या?’ 11 तेरा वैभव अर तेरी सारंगियाँ का शब्द अधोलोक म्ह तारया गया सै; कीड़े तेरा बिछोणा अर केंचुए तेरा ओढ़णा सैं।"
12 "हे भोर के चमकण आळे तारे तू किस तरियां अकास तै गिर पड्या सै? तू जो जात्ति-जात्ति ताहीं हरा देवै था, तू इब किस तरियां काटकै धरती पै गिराया गया सै? 13 तू मन म्ह कहवै तो था, ‘मै सुर्ग पै चढूंगा; मै अपणे सिंहासन नै परमेसवर के तारागण तै घणा ऊँच्चा करुँगा; अर उत्तर दिशा की छोर पै सभा के पहाड़ पै विराजूँगा; 14 मै बाद्दळां तै भी ऊँची-ऊँची जगहां कै उप्पर चढूंगा, मै परमप्रधान परमेसवर कै बराबर हो जाऊँगा।’ 15 पर तू अधोलोक म्ह उस खड्डे की तह ताहीं उतारया जावैगा। 16 जो तेरे ताहीं देखैगें तेरे ताहीं देखदे होए तेरे बारै म्ह सोच-सोचकै कहवैंगे, ‘के यो वोए माणस सै जो धरती नै चैन तै रहण न्ही देवै था अर राज्य-राज्य म्ह घबराहट डाल देवै था; 17 जो जगत नै उजाड़ बणान्दा अर उसके नगरां नै ढ़ा देवै था, अर अपणे कैदियाँ नै घर जाण न्ही देवै था?’ 18 जात्ति-जात्ति के सारे राजा अपणे-अपणे घर पै महिमा कै गैल आराम तै पड़े सैं; 19 पर तू निकम्मी शाख की तरियां अपणी कब्र म्ह तै फेक्या गया; तू उन मारे होया की लाशां तै घिरया सै जो तलवार तै बिधकै खड्डे म्ह पत्थरां कै बीच म्ह लताड़ी होई लोथ की तरियां पड़े सै। 20 तू उनकै तरियां कब्र म्ह ना गाड्या जावैगा, क्यूँके तन्नै अपणे देश ताहीं उजाड़ दिया, अर अपणी प्रजा का घात करया सै।"
"कुकर्मियाँ के वंश का नाम भी कदे न्ही लिया जावैगा। 21 उनके बुजुर्गां के अधर्म कै कारण बेट्टयाँ के घात की त्यारी करो, इसा ना हो के राजा के बाळक फेर उठकै धरती के अधिकारी हो जावैं, अर जगत म्ह भोत सारे नगर बसावैं।"
22 सेनाओं के यहोवा की या वाणी सै, "मै उनकै खिलाफ उठूँगा, अर बाबेल का नाम अर निशान मिटा दियुँगा, अर बेट्यां-पोत्यां ताहीं काट देऊँगा," यहोवा की योए वाणी सै। 23 "मै उस ताहीं साही की माँद अर पाणी की झील कर देऊँगा, अर मै उसनै सत्यानाश के झाड़ू तै झाड़ देऊँगा," सेनाओं के यहोवा की योए वाणी सै।
24 सेनाओं के यहोवा नै या कसम खाई सै, "बेसक जिसा मन्नै ठाण्या सै, उसाए हो जावैगा, अर जिसी मन्नै योजना बणाई सै, उसीए पूरी होवैगी, 25 के मै अश्शूर नै अपणे ए देश म्ह तोड़ देऊँगा, अर अपणे पहाड़ां पै उसनै कुचल देऊँगा; फेर उसका जूआ उनकी गर्दनां पै तै अर उसका बोझ उनके कंधे पै तै उतर जावैगा।" 26 याए योजना सारी पृथ्वी कै खात्तर ठहराई गई सै; अर यो वोए हाथ सै जो सारी जातियाँ पै बढ्या होया सै। 27 क्यूँके सेनाओं के यहोवा नै योजना बणाई सै अर कौण उस ताहीं टाळ सकै सै? उसका हाथ बढ़ाया गया सै, उसनै कौण रोक सकै सै?
28 जिस साल म्ह आहाज राजा मर ग्या उसे साल मेरे ताहीं या भारी भविष्यवाणी होई
29 "हे सारे पलिश्तीन तू इस करकै आनन्द ना करै, के तेरे मारण आळे की लाठ्ठी टूटगी, क्यूँके साँप की जड़ तै एक काळा नाग पैदा होवैगा, अर उसका फळ एक उड़ण आळा अर तेज जहर आळा अग्निसर्प होवैगा। 30 फेर कंगालां के जेठ्ठे खावैंगे अर गरीब माणस निडर बैठण पावैंगें, पर मै तेरे खानदान ताहीं भूख तै मार देऊँगा, अर तेरे बचे होए माणस घात करे जावैंगे। 31 हे फाटक, तू मदद खात्तर हाय! हाय! कर; हे नगर, तू चिल्ला; हे पलिश्तीन तू सारे का सारा पिंघळ ज्या! क्यूँके उत्तर तै एक धुआँ उठैगा अर उसकी सेना म्ह तै कोए पाच्छै न्ही रहवैगा।"
32 फेर जात-जात के दूत्तां ताहीं के जवाब दिया जावैगा? या के "यहोवा नै सिय्योन की नींव गेरी सै, अर उसकी प्रजा के दीन माणस उस म्ह शरण लेवैगें।"