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यशायाह 20

भवियवकि्‍

1 िअशसरकम तरििशहर अशआकउसतकरयअर उस ीं िा, 2 उसयहआमयशकहा, "अपणकमर लत20:2 टाट के लत्ते टाट एक भोत मोटा कपड़ा होया करदा जो दुःख, पश्चाताप या शर्म दिखाण खात्तर पहरया जावै था अर अपणउत;" उसनउसकरया, अर उघ़ा ाँ मदिा।20:2 उघाड़ा होकै नंगे पाँ घूमदा फिरै था। यानिके भविष्यवक्ता के खास कपड़यां कै बिना। 3 यहकहा, "ितरिां यशउघ़ा अर लदआयै, िअर तर ि्‍अर लकषण ो, 4 उसतरिां अशिअर णसां ीं बणि़ा ा, े़, रयीं बणउघ़े अर ाँअर ितम्‍ा, िसतिशरिो।20:4 मिस्र शर्मिन्दा हो। हार ज्याणा उनके खात्तर शर्म का कारण होगा अर कैदी बणाकै ले जाया ज्याणा बेजती का कारण होवैगा। 5 रण िसपउनकउम20:5 इथोपिया, अर िरण िसपअर शरिैंे। 6 अर समदर इस बसण आळििउस बखत कहवैंे, ो, ििरहण आळहम उमां अर िनकहम अशबचण तर जण उनकइसलत ै। हम णस ितरिां बचांें’?"

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