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यशायाह 32

िकत

1 32:1 देक्खो प्रका. 19:11; इब्रा. 1:8,9, एक िकतकरा, अर जककरैंे। 2 हर एक अधि्‍िपण जगहां, अर आडा; िजल झरणे, अर गरम धरतबड़ी चटा। 3 उस बखत खण आळयां ुँधळीं, अर णण आळयां रहवैंे। 4 उतवळयां मन समझें, अर तळयां अर ्‍ी। 5 सजजन अर कहा। 6 ूँखतअर मन अनरगढरहवअधरकरअर यहिकहवै, रहण अर ्‍ै।32:6 यानिके वो तो अपणे स्वभाव के मुताबिक ए बात करैगा। उसका स्वभाव ए मूर्खता की बात करणा सै, अंत म्ह वो मूर्खता ए उगळैगा। 7 छळ ैं ैं, जनबणगरां जबकि अर नमरतों। 8 पर सजजन णस उदरतजनबणै, उदरतिरहवा।

यरशलजनिों

9 जनिों, उठको; िकर िों, वचन और लग10 िकर जनिों, भर घणबखत थम कमजओगी; ूँतर ीं अर िफळ ैंे। 11 जनिों, थरथर, िकर जनिों, कमजो; मनतर अपणे-अपणकपड़े रकअपणी-अपणकमर कसो। 12 मनभां अर फलवनखलततर ैंी। 13 णसां32:13 मेरे माणसां यरुशलेम के रहणआळे बलकशहनगर भरघरां कई कटिदरखत उपजैंे। 14 ूँजभवन ा, र-सरभरयनगर नसअर पह़ी अर उनपपहरां घर सदतर अर गळगधां रहण जगहां अर घरपशचरउस बखत ीं बणरहवैं15 िीं परमसवर आतउपपर उणै, अर गळ फळदयक बणै, अर फळदयक बण िै। 16 उस गळ बसा, अर उस फळदयक िकतरहवी। 17 अर32:17 अर रोम. 14:7; याकू. 3:18 िकतफळ ि अर उसकनतिसदअर िकर रहणा। 18 णस ि जगहां िकर रहवैंे, अर आरजगहां रहवैंे। 19 बण िबखत ओळिैंे, अर नगर तरिां पट ा। 20 ितणधनथम जलशयां े, अर बळधां अर गधां आजचरो।

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