धार्मिकता का राज्य
1 देक्खो32:1 देक्खो प्रका. 19:11; इब्रा. 1:8,9, एक राजा धार्मिकता तै राज्य करैगा, अर राजकुमार न्याय तै राज करैंगे। 2 हर एक अधिकारी मान्नो आँधी तै छिपण की जगहां, अर बौछार तै आड़ होवैगा; या निर्जल देश म्ह पाणी के झरणे, अर गरम धरती म्ह बड़ी चट्टान की छाया। 3 उस बखत देखण आळयां की आँख धुँधळी न्ही होवैगीं, अर सुणण आळयां के कान लाग्गे रहवैंगे। 4 उतावळयां के मन ज्ञान की बात समझैगें, अर तोतळयां की जीभ फुर्ती तै अर साफ बोल्लैगी। 5 मूर्ख फेर सज्जन न्ही कुह्वावैगा अर ना कंजूस दानी कह्या जावैगा। 6 क्यूँके मूर्ख तो मूर्खता ए की बात बोल्दा अर मन म्ह अनर्थ ए गढ़दा रहवै सै के वो अधर्म के काम करै अर यहोवा कै खिलाफ झूठ कहवै, भूखे नै भूखा ए रहण दे अर प्यासे का पाणी रोक्के राक्खै।32:6 यानिके वो तो अपणे स्वभाव के मुताबिक ए बात करैगा। उसका स्वभाव ए मूर्खता की बात करणा सै, अंत म्ह वो मूर्खता ए उगळैगा। 7 छळ की चाल बुरी होवैं सैं, वो दुष्ट योजना बणावै सै के गरीब नै भी झूठ्ठी बात्तां म्ह लूटै जबकि वे ठीक अर नम्रता तै भी बोल्दे हों। 8 पर सज्जन माणस उदारता ए की योजना बणावै सै, वो उदारता म्ह स्थिर भी रहवैगा।
यरुशलेम की जनानियों
9 हे सुखी जनानियों, उठकै मेरी सुणो; हे बेफिकर बेटियों, मेरे वचन की और कान लगाओ। 10 हे बेफिकर जनानियों, साल भर तै कुछ ए घणे बखत म्ह थम कमजोर हो जाओगी; क्यूँके तोड़ण खात्तर दाख न्ही होवैगीं अर ना किसे ढाळ के फळ हाथ लागैंगे। 11 हे सुखी जनानियों, थरथराओ, हे बेफिकर जनानियों, कमजोर हो; शोक मनाण खात्तर अपणे-अपणे कपड़े तारकै अपणी-अपणी कमर म्ह टाट कसो। 12 वे मनभाऊ खेत्तां अर फलवन्त दाखलता खात्तर छात्ती पीटैंगी। 13 मेरे माणसां32:13 मेरे माणसां यरुशलेम के रहणआळे कै बलके खुशहाल नगर के सारे खुशी तै भरे घरां म्ह भी कई ढाळ के कटिले दरखत उपजैंगे। 14 क्यूँके राजभवन छोड्या जावैगा, शोर-सराबे तै भरया नगर सुनसान हो जावैगा अर पहाड़ी अर उनपै के पहरेदारां के घर सदा खात्तर गुफा अर जंगळी गध्यां के रहण की जगहां अर घरेलू पशुआं की चराई उस बखत ताहीं बणे रहवैंगे 15 जिब ताहीं परमेसवर की आत्मा उप्पर तै म्हारे पै उण्डेल्या ना जावै, अर जंगळ फळदायक बारी ना बणै, अर फळदायक बारी फेर बण ना गिणी जावै। 16 फेर उस जंगळ म्ह न्याय बसैगा, अर उस फळदायक बारी म्ह धार्मिकता रहवैगी। 17 अर32:17 अर रोम. 14:7; याकू. 3:18 धार्मिकता का फळ शान्ति अर उसका नतिज्जा सदा का चैन अर बेफिकर रहणा होवैगा। 18 मेरे माणस शान्ति की जगहां म्ह बेफिकर रहवैंगे, अर आराम की जगहां म्ह सुख तै रहवैंगे। 19 बण के विनाश कै बखत ओळे गिरैंगे, अर नगर पूरी तरियां तै चौपट हो जावैगा। 20 कितणे धन्य हो थम जो सारे जलाशयां कै धोरै बीज बोन्दे, अर बळधां अर गध्यां नै आजादी तै चराओ सो।