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सपन्याह 1

14 यहभयनक िै, घणरफतचलआवै; यहिशबपड़ै ै, ओड़ै कतवर िुःि्‍ै।1:14 प्रका. 6:17 15 बदलिा, कट अर सकिउजअर िि, अर अनधकि1:15 वो अंधेर अर घोर अन्धकार का दिन क्यूँके सूरज अर चाँद की रोशनी खतम हो जावैगी अर मेम्‍ने की रोशनी दुष्टां पै न्ही चमकैगी, वे अन्धकार म्ह गेर दिए जावैंगे। दळ अर घटिा। 16 गढआळनगरां अर ्‍मटां िनरसिंूँकण अर ललकरण िा। 17 णसां कट ूँा, अर आनधयां तरिां ्‍ें, ूँउननयहिकरयै; उनकलहतरिां, अर उनकाँमल तरिां ेंिा। 18 यहबदलि, ाँउनकबचा, अर ्‍ै; ूँउसकजळण आग भसी; धरतरहण आळयां घबरउनकअनकर ा।

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