1 तेरे पछेन सरग सी मट्ली गड़दी काजे उची अवाज सी असो कवतो सामळ्यु, "भगवानेन बड़ाय हवे! छुटकारु, ने सेक-सींगार, ने ताकत हामरा भगवानेत ने छे। 2 काहाकी तेरा नीयाव संय ने वारु छे, तेरेमां की हयु तीनी मट्ली रंडीन जी आपसा छीनाळा सी धरती काजे भुंडी कर देदली, नीयाव कर्यु, ने तीनी सी आपसा पावर्यान लुहीन पलटु लेदलु छे।" 3 अळी दीसरी कावा चे कह्या, "बड़ाय! तेरे धपणेन कुळु जलम जातु रवसे।"
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