1 निक्खा नाम मेहगा इतर लग अउ मिरतू कर रोज जनम कर रोज लग बढिहा हबै। 2 भोज कर घर जाय लग दुख के घर जाय के बढिहा हबै, काखे सगलू मनसेन के आखरी मिरतू हबै। 3 हंसी लग दुख बढिहा हबै, काखे मुंह कर सोक लग मन सुधरथै। 4 हुसियारन के मन सोक करै बाले के घर के पल्ला लगे रथै, पय मूरखन के मन मगन करै बालेन के घर लगे रथै। 5 मूरख के गाना सुनै लग निक्खा हबै हुसियार के डांट दपट सुनै के निक्खा हबै। 6 काखे मूरख कर हंसी हांडी बरतन कर तरी जलथै हर कांटा चरचराहट कर जसना होथै उहो बेकार हबै। 7 निस्चय अंधियार लग हुसियार बेकार हुइ जथै अउ घूंस लग दिमाक नस्ट होथै। 8 कउनो काम के सुरू लग ओखर अंत निक्खा हबै, अउ धीरज बाले डउका घमंड लग अच्छा हबै। 9 अपन मन हे उताबली लग गुस्सा झइ होबे, काखे गुस्सा मूरख कर हिरदय हे रथै। 10 हइ न कहबे, गुजरे हर रोज इन लग काखे निक्खा रथै? काखे तै हुसियार लग काखे सबाल नेहको पूंछथस? 11 दिमाक मिरास के संग निक्खा होथै, पय जिन्दा रहैबाले के निता लाभकारी हबै। 12 दिमाक के आसरा डेरा के आसरा के जसना हबै, ग्यान लग हइ फायदा हबै, कि ऊ अपन दिमाक लग जीवन के सुरक्छित रखथै। 13 भगवान के कामन हे बिचार करा, जेही भगवान टेढवा बनाय हबै, उके कउन सिध्धा कर सकथै? 14 सुख के रोज खुसी बनाबा, पय दुख के रोज हे बिचार करा, काखे भगवान सुख अउ दुख दुनो के बनाय हबै, ताकि मनसे हइ बात के होय बाले भेद कर नेहको पाय सकिन। 15 मै अपन बेकार जीवन हे हइ देखे हव, नेक मनसे अपन धारमिकता हे मरथै, पय दुरजन मनसे बुराई करत दीरघाय होथै। 16 अपन के बोहत नेक झइ बना, अउ न अपन के जादा हुसियार बना तै काखे अपन नास के कारन हबस? 17 बोहत जादा बेकार झइ बन, अउ न मूरख होय नहिता तै टेम के आगुन काखे मरिहे? 18 निक्खा हइ हबै कि तै अक्ठी के पकरे रहा, अउ दूसर के अपन हाथन लग झइ निकरै देया, जउन मनसे भगवान कर डेर मानथै, ऊ हइ सगलू समस्या लग पार हुइ जही। 19 दिमाक लग सहर के दसठे हाकिम के अपेक्छा हुसियार के जादा सक्ति मिलथै। 20 निस्चित दुनिया हे कउनो असना नेक मनसे नेहको हबै जउन हरमेसा भलाई करथै अउ जेखर लग पाप नेहको हुइस। 21 जेतका बात कहे जाय सब हे कान झइ लगाबे, असना झइ होय कि तै सुने कि तोर हरवाह तोके सराप देथै। 22 काखे तै खुद जानथस कि तै बोहत बेर दूसर के सराप दय हवस। 23 हइ सगलू मै दिमाक लग जांच लय हबै, मै कथो, मै हुसियार हुइ जहुं पय हइ मोर लग दुरिहां रहिस। 24 ऊ जउन दुरिहां अउ अंतखोह गहिरा हबै, ओखर भेद कोनहर पाय सकथै? 25 मै अपन मन लगायों कि दिमाक के बारे हे जान लयो, कि खोज निकारों अउ ओखर भेद जानो, अउ दुस्टता के मूरख अउ मूरखता जउन निरा पागलपन हबै। 26 मै मिरतू लग जादा दुखदाई अक चीज पायों, मतलब ऊ डउकी जेखर मन फन्दा अउ जाला हबै, अउ जेखर हाथ हे हथकडिया हबै, अउ जउन डउका लग भगवान मगन हबै, उहै ओखर लग बची, पय पापी ओखर सिकार होही। 27 देख, उपदेसक कथै, मै ग्यान के निता अलगे-अलगे बात मिलायके जांचही, अउ हइ बात निकारिस। 28 जेही मोर मन अब खोजथै, पय नेहको पाथै, हजार मसे मै अक्कोठे डउकी नेहको पायों। 29 देखा मै सिबाय हइ बात पाय हबै, कि भगवान मनसे के सिध्धा बनाइस, पय उन बोहत युक्ति निकारे हबै।
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