1 राजा क्षयर्ष का जमाना कि बात हइ उ राजो भारत देश से लिखे कुश देश तक एक सौ सत्तावीस देशहोन पर राज्य करतो थो. ओका राज्यकाल मे या घटना घडी. 2 उ हि दिन मे जब क्षयर्ष राजा अपनी वा राजगद्दी पर विराजमान थो जो शूशनगढ मे थो. 3 राजा ने अपना शासन का तीसरा साल अपना सब उच्चाधिकारिहोन, दरबारिहोन, फारस अरु मादय देशहोन को सेनापतिहोन, अरु अपना देशहोन का प्रधान तथा राज्यपाल खे अपना महल मे खानो दियो. 4 खानो-उत्सव छ:महीना तक मनायो गयो. उ अवधि मे ओने महिमानहोन खे अपना आदर राजकिय वैभव बतायो अरु अपनी प्रभुता कि शान-शौकत प्रदर्शित की. 5 एक सौ अंस्सी दिन का बाद राजा क्षयर्ष ने अपना महल का बगीचा का अंगन मे शूशनगढ का सब निवासिहोन का छोटा-बडा सब खे खानो दियो. यो खानो-उत्सव सात दिन तक चली रो थो. 6 खाना-स्थल पर चांदी कि छेड मे अरु संगमर्मर का खंम्भा मे मलमल अरु बैंगनी रंग का पतला सूत का दरवाजाहोन पर सफेद सुती परदा टाग्या था अरु नीला रंग कि झालरहोन लटकी री थी. लाल, सफेद, पीला, अरु काला संगमर्मर का फर्श पर सोना अरु चांदी को आसम रख्या था. 7 महीमानहोन खे सोना की गिलास मे दाअरु पिलई गई. ये गिलास भिन्न प्रकार का था. राजा की शान-शौकत का अनुरुप दाखमधु महिमानहोन खे चेक करी पिलई गई. 8 दाखमधु पिन का लिये क्युकी राजा ने अपना महल का खानोबनानवालाहोन खे यो आदेश दिखे रख्यो थो कि महिमानहोन कि इच्छा नुसार उनका सात व्यवहार कऱ्यो जाये. 9 रानी वशती ने राजा क्षयर्ष का महल मे लुगेनहोन खे खानो दियो थो. 10 सातवा दिन, जब राजा क्षयर्ष दाअरु मे मगन थो, ओने अपना सात सेवक-खोजा-महुमान, बिज्जता, हर्बोना, बिग्ता, अबगता, जेतेर अरु कर्करश नामको आदेश दियो 11 कि वे रानी वशती खे राजमुकुट का सात राजा का सामने पेश कर ताकि देश दुनियाहोन अरु दरबारिहोन खे ओकी खुबसुरती प्रगट हुइ जाये; क्युकी रानी वशती देखना मे खुबसुरती थी. 12 परन्तु दासहोन का वजेसे राजा कि या आज्ञा सुनीखे वशती रानी आन खे इन्कार कऱ्यो. या बात से राजा खे बहुत घुस्सा अइ. 13 तब राजा ने विद्वानहोन खे अरु सलाकारहोन खे बुलयखे पुछ्यो राजा कि या नीति थी की वा विधि अरु न्यान-शास्त्र का ज्ञानिहोन से असो ही करतो थो. 14 ओका सात मे कर्शना, शेतार, अदमाता, तर्शीश, मेरेस, मर्सना अरु ममूकान ये फारस अरु मादय देशहोन का सात प्रशासक था. जो राजा का सम्मुख मिलता था. राज्य मे मुख्य पद पर चुनिखे गया था. 15 क्षयर्ष राजा ने उनका से पुछ्यो, "मेने खोजा का वजेसे जो आदेश रानी वशती खे भोज्यो थो, ते अत: कानून का अनुसार ओका सात का व्यवहार कऱ्यो जाये?" 16 ममूकान ने राजा क्षयर्ष अरु शासकहोन का उपस्थिती मे उत्तर दियो, "रानी वशती ने, जो अनुचित काम कऱ्यो हइ नी फक्त महाराज का प्रति अपराध कऱ्यो हई जबकी महाराज का अधीन समस्त देशहोन का शासकहोन अरु निवासिहोन का प्रति भी अपराध कऱ्यो हई. 17 किक्यु क्षयर्ष राजा ने वशती रानी खे ओका सामने आन कि आज्ञा दी परन्तु वा नी मानी या बात सब बइहोन मे सुनी ले ते वे भी अपना अदमी खे तुच्छ मानन लगे." 18 आज ही फारस अरु मादय देशहोन कि बईहोन, जेने रानी वशती का या काम की बात सूनी हई, राजा को प्रशासकहोन से या बात बोली. यो प्रकार अदमी खे बइ पर बहुत घुस्सा हुये. 19 अगर महाराज खे यो उचित प्रतीत हुये ते उ एक राजा प्रसारित करे, अरु यो राजो फारस अरु माद्य देशहोन को विधि-शास्त्र मे लिखी ली जाये ताकी यो रद्द नी करी जय सखे "वशती महाराज क्षयर्ष का सम्मुख आज से फिर कभी उपस्थित नी हुई सखे." महाराज पटरानी को पद कोय अन्य बई खे, जो ओकासे अच्छी हुये प्रदान करे. 20 अन्त जब राजा या आज्ञा ओका सब राज्य मे सुनय जाये, तब सब बइ अपना लोग को आदर सम्मान करती ऱ्हीहे चाहे गरीब हुये या अमीर हुये, 21 या बात राजा खे अरु शासकहोन खे पसन्द अइ अरु राजा ममूकान कि बातहोन मे सलाह मानी लियो अरु ओका सब राज्य मे. 22 अर्थात सब प्रान्तहोन का आक्षरहोन मे अरु सब जाती की भाषाहोन मे चिठ्ठी भेजी, कि सब अदमी अपना अपना घर मे अधिकार चालाये, अरु अपनी जाति कि भाषा बोली करे.
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Ester 1
वशती रानी राजा क्षयर्ष कि बात नी माने
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