20 इन बातहोन को वृत्तान्त लिखकर, मोर्दकै ने राजा क्षयर्ष खे सब देशहोन में, क्या निकट क्या दूर ऱ्हेनवाला सारे यहुदिहोन खे पास चिट्ठिहोन भेजीं, 21 अरु ह्या आज्ञा दी, कि अदार महीने खे चौदहवें अरु उ महीने खे पन्द्रहवें दिन को प्रति वर्ष माना करें. 22 जिनमें यहुदिहोन ने अपने दुश्मनहोन से अराम पाया, अरु ह्या महीना जेमे शोक आनन्द से, अरु विलाप खुशी से बदला गया; माना करें अरु उनको भोज अरु आनन्द अरु एक दूसरे खे पास भोजन सामग्री भेजने अरु कंगालों को दान देने खे दिन मानें. 23 अतः यहुदिहोन ने जसो पैयलेसे किया था, अरु जसो मोर्दकै ने उनने लिखा, असो ही करने का निश्चय कर लिया. 24 क्योंकि हम्मदाता अगागी का बेटा हामान जो सब यहुदिहोन का विरोधी था, ओने यहुदिहोन का नाश करने की युक्ति की, अरु उनने मिटा डालने अरु नाश करने खे लिये पूर अर्थात् चिट्ठी डाली थी. 25 परन्तु जब राजा ने ह्या जान लिया, तब ओने आज्ञा दी अरु लिखवाई कि जो दुष्ट युक्ति हामान ने यहुदिहोन खे विअरुद्ध की थी वह उ खे सिर पर पलट आह्ये, तब वह अरु उसखे बेटा फांसी खे खम्भों पर लटकाए गए. 26 यो कारण उन दिनहोन का नाम पूर शब्द से पूरीम रखी गया. यो चिट्ठी की सब बातहोन का कारण, अरु जो कुछ उन्हे यो विषय में देखा अरु जो कुछ उन पर बीता था, उसखे कारण भी 27 यहुदिहोन ने अपने-अपने लिये अरु अपनी सन्तान खे लिये, अरु उन सभी खे लिये भी जो उनमें मिल गए थे ह्या अटल जान कऱ्यो, कि उस लेख खे अनुसार प्रति वर्ष उसखे ठहराए हुए समय में वे ये दो दिन मानें. 28 अरु पीढी-पीढी, कुल-कुल, प्रान्त-प्रान्त, नगर-नगर में ये दिन स्मरण कऱ्यो अरु माने जाएँगे. अरु पूरीम नाम खे दिन यहुदिहोन में कभी न मिटेंगे अरु उनका स्मरण उनखे वंश से जाता न रहेगा. 29 फिर अबीहैल की बेटी एस्तर रानी, अरु मोर्दकै यहूदी ने, पूरीम खे विषय ह्या दूसरी चिट्ठी बड़े अधिकार खे साथ लिखी. 30 इसकी नकलें मोर्दकै ने क्षयर्ष खे राज्य खे, एक सौ सत्ताईस देशहोन खे सब यहुदिहोन खे पास शान्ती देनेवाली अरु सच्ची बातहोन का साथ यो आशय से भेजीं, 31 कि पूरीम खे उन दिनहोन खे विशेष ठहराए हुए समयों में मोर्दकै यहूदी अरु एस्तर रानी की आज्ञा खे अनुसार, अरु जो यहुदिहोन ने अपने अरु अपनी सन्तान खे लिये ठान लिया था, उसखे अनुसार भी उपवास अरु विलाप कऱ्यो जाएँ. 32 पूरीम खे विषय का ह्या नियम एस्तर की आज्ञा से भी स्थिर किया गया, अरु उनकी चर्चा किताब में लिखी गई.