18 नीन घाई परमेश्वर येल आन जो अन्याय इक क्षमा माळुल अदिक तान निज भाग इन ऊळ्द लॉकुर्द अपराध इक मुच्च बुळुल? आव तान क्रोध इक हमेशा बनुस्कु ईरालुन, यतिकी आव करुणा से प्रीती ईटतान.
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18 नीन घाई परमेश्वर येल आन जो अन्याय इक क्षमा माळुल अदिक तान निज भाग इन ऊळ्द लॉकुर्द अपराध इक मुच्च बुळुल? आव तान क्रोध इक हमेशा बनुस्कु ईरालुन, यतिकी आव करुणा से प्रीती ईटतान.