10 प्रेम इसमें नहीं कि हमने परमेश्वर से प्रेम रखा, बल्कि इसमें है कि परमेश्वर ने हमसे प्रेम रखा और अपने पुत्र को हमारे पापों के प्रायश्चित्त के लिए भेजा। 11 प्रियो, जब परमेश्वर ने हमसे ऐसा प्रेम रखा, तो हमें भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। 12 परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा। यदि हम आपस में प्रेम रखते हैं, तो परमेश्वर हममें बना रहता है और उसका प्रेम हममें सिद्ध हो चुका है।
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यूहन्ना की पहली पत्री 4
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