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Psalms 54

टकिथन

िशक िरवय-यों ऊद मशजब िों आकर ऊल कहा, "ऊद हमें िनहीं रहता?"

1 परम्‍वर, अपनबचा,

और अपनपररम कर

2 परम्‍वर, थन,

ुँवचनों पर लगा।

3 ोंि परदिउठ खड़ैं,

और िदयमनपड़ैं।

परम्‍वर अपनसमनहीं रखते। ा।

4 ो, परम्‍वर सहयक ै;

रभलनै।

5 वह शतइयों उनीं पर ा।

परम्‍वर, अपनसच्‍रण उनककर

6 ैं बलि चढ़ा।

यहा, ैं धनयवकरूँा,

ोंि यह भलै।

7 उसनसब कटों ै,

और ों शतपरजय ै।

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