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Psalms 105

अपनों रति परम्‍वर ि्‍सययत

1 यहधनयवकरो,

उससथनकरो; श-दों ें

उसकरकट करो।

2 उसकि, उसकिभजन ;

उसकसब आश्‍चरयकरों वरणन करो!

3 उसकपविरशकरो;

यहिों दय आनिो।

4 यहऔर उसकमरो;

उसकदरशन ितर बनरहो।

5 उसकिअदों मरण करो;

उसकआश्‍चरयकरों और उसकिकलिणयों मरण करो।

6 उसकअबहम ,

, उसक!

7 वहहमपरम्‍वर यहै;

पर उसिणय ैं।

8 वह अपनसदमरण रखतै,

यह वह वचन

उसनहज़िों िठहरै।

9 उसनयहअबहम ाँी,

और उसकिषय ें

उसनइसहशपथ ी।

10 उसनइसििि,

और इसएल िसद

ें िा,

11 और कहा, "ैं उततरिें कनूँा,

शजों ा।"

12 उस समय िनतें कम े,

बलि बहकम,

और उस ें परदे।

13 एक ि सरि,

और एक सरें िरतरहे;

14 परउसनिमनउन पर करनिा;

और वह उनकिषय ें यह वन:

15 "अभिि्‍ों मत ,

और भवियवक्‍ि पहुँ!"

16 उसनउस ें अका,

और अन्‍सब कर ि

17 िउसनएक

उनसपहला,

िगया।

18 ों उसकों ें िाँ लकर उसुःिा;

उसों जकड़कर रखगया।

19 और जब तक उसक

तब तक यहवचन

उसकसपर कसतरहा।

20 तब िजकर उसिकलविा,

ाँ, िों सक उस्‍िा।

21 उसनउसअपनजभवन रध,

और अपनपदपर अधिठहरा,

22 ि वह उसकअधिपतिों अपनिरण ें रखे,

और उसकिों105:22 अक्षरशः वृद्धों ि ें ि

23 िइसएल िें आया;

और ें परदकर रहा।

24 तब यहअपनरजें बहबढ़ा,

और उसउसकशतअधिबलविा।

25 उसनििों मन ऐसि

ि उसकरजरखने,

और उसकवकों छल-कपट करनलगे।

26 उसनअपनो,

और अपना।

27 उनोंउनकउसकअद,

और ें चमति

28 उसनधका,

और िगया;

और उसकवचन िनहीं गए

29 उसनििों जल लहें बदल िा,

और मछलिों ा।

30 ेंढक उनकें,

यहाँ तक ि उनकसकों

ककों ें भर गए

31 उसनआजी,

और ाँों ुंगए,

और उनकें टकिाँ गईं।

32 उसनवरबदलओलबरस,

और उनकें िजलिाँ ि105:32 अक्षरशः धधकती आग

33 उसनउनकखलतऔर ों ा,

और उनकसब ों नष्‍कर िा।

34 उसनआजी,

तब अनगििििाँ और आए,

35 और उनकसब वनसपति गए,

और ि उपज चट कर गए

36 उसनउनकसब पहलों ो,

अरउनकपहलफल नष्‍िा।

37 तब वह इसएलिों और ाँिा,

और उनमें िबल ा।

38 उनकचलिआनि,

ोंि उनमें उनकडर समगया।

39 उसनिदल ा,

और रकिआग रकट ी।

40 उनोंाँतब उसनबटें ीं,

और उनें वरजन ्‍िा।

41 उसनचटजल िकला,

और िजल ि पर नदबहनलगी।

42 ोंि उसअपनअबहम रति अपन

पविरतिमरण ा।

43 वह अपनरजआन,

और अपन

जय जयकिा।

44 उसनउनें अनयजिों ि,

और उनोंअनों परिरम फल पर

अधिकर िा,

45 ि उसकििों ें,

और उसकयवसलन करतरहें।

ि कर105:45 इब्रानी में "हल्लिलूयाह"!

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