Pular para o conteúdo
Publicidade

Psalms 45

जकि

िशक िशन्‍पर रहविों मशएक

1 दय ें एक मधउमड़ रहै,

ैं अपनूँ।

िखक खनबनै।

2 मनों ों ें अति ुंदर ै,

ोंअनरह परिैं;

इसलिपरम्‍वर सदा-सरवद

िआशिै।

3 रव, अपनतलव

कमर पर ाँे,

भव और रतै!

4 सत, नमरता, और िकति

अपनरतपर सवकर

िजयपवक आगबढ़

िभयनक ि

5 ैं,

शतदयों धतैं।

श-दमनिरतैं।

6 परम्‍वर, िंसन सदा-सरवद

ििै।

जद

जदै।

7 िकत

और ्‍टतिै,

इसलिपरम्‍वर, परम्‍वर

िों बढ़कर हर

अभििै।

8 सब वस्‍धरस, अगर,

और जपिैं :

ाँमहलों रवों

आनििै।

9 रति्‍िमहिें जकिाँ ैं;

महिओर ओप

आभिकर खड़ै।

10 ी, ,

लगकर :

अपनों और अपनि

घर ा;

11 तब ुंदरतकरा।

वह रभै,

उसडवतकर

12 ेंकर आएगी,

और रजधन

्‍करनरयकरेंे।

13 महल ें जकअति यमै;

उसकवस्‍ों ें ल-बकढ़ैं।

14 ल-बवस्‍ों सज्‍ि

वह पहुँएगी;

उसके-उसकुँसहिाँ

पहुँी।

15 आनऔर हरउनें पहुँएगा;

और महल ें रवकरेंी।

16 वजों पर ोंे;

उनें समसपर सक ठहरएगा।

17 ैं तक मरणबना;

इस रण श-द

सदा-सरवदधनयवकरतरहेंे।

Estes versículos te tocaram? Ore agora!

+581 estão orando agora.

Junte-se à corrente de oração.

Veja também