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Psalms 98

िि

एक भजन

1 यहिएक नय,

ोंि उसनआश्‍चरयकरिैं।

उसकिऔर पवि

उसकििजय ्‍ै।

2 यहअपनिटकषणै;

उसनअनयजिों ्‍ि ें अपनिकतरकट ै।

3 उसनइसएल घररति अपनकर

और सच्‍मरण िै;

और सब र-द

ों हमपरम्‍वर िजय ै।

4 ो,

यहजय जयककरो!

आनभरकर जय जयककरो,

और भजन !

5 बजकर, ाँ,

मधवर ें बजकर यहभजन

6 हमयहमनरहिाँ

और नरसिंूँूँककर जय जयककरो।

7 समऔर उसमें ै,

गरज उठें! जगत और उसकिहरषनकरें।

8 नदिाँ िाँ बजँ;

पहएक िलकर आनँ।

9 यह यहमनो,

ोंि वह करनिआनै।

वह जगत िकते,

और श-दों खरकरा।

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