1 मूर्ख अपने मन में कहता है,
"परमेश्वर है ही नहीं।"
वे भ्रष्ट हैं,
और अधर्म के घृणित कार्य करते हैं।
ऐसा कोई नहीं जो भलाई करता हो।
2 परमेश्वर स्वर्ग से मनुष्यों पर दृष्टि करता है
कि देखे कि कोई बुद्धिमान,
कोई परमेश्वर का खोजी है या नहीं।
3 वे सब भटक गए,
सब के सब भ्रष्ट हो गए हैं;
कोई भलाई करनेवाला नहीं,
एक भी नहीं।
4 क्या बुराई करनेवाले नासमझ हैं?
वे मेरे लोगों को ऐसे खा जाते हैं
जैसे रोटी खाते हों,
और परमेश्वर का नाम भी नहीं लेते।
5 जहाँ भय का कोई कारण न था,
वहाँ उन पर भय छा गया,
क्योंकि परमेश्वर ने उन लोगों की हड्डियों को
तितर-बितर कर दिया जो
तेरे विरुद्ध छावनी डाले थे।
तूने उन्हें लज्जित कर दिया,
क्योंकि परमेश्वर ने उन्हें त्याग दिया था।
6 कितना अच्छा हो कि इस्राएल का
उद्धार सिय्योन से प्रकट हो!
जब परमेश्वर अपनी प्रजा को बंधुआई से लौटा लाएगा,
तब याकूब मगन और इस्राएल आनंदित होगा।