Pular para o conteúdo
Publicidade

Psalms 58

अनि

िशक िअल तशहपर ऊद ि्‍

1 सको, सचम

धरलतो?

मनो, खरकरतो?

2 नहीं, अपनमन ें िकरतो;

भर ें िंकरतरहतो।

3 ्‍गरपरैं,

और जन

लतभटक ैं।

4 उनमें सरिै,

बहरसमैं,

अपनकर ै;

5 और सपनहीं नता,

सपपढ़नें ितन

शल ों ो।

6 परम्‍वर, उनकुँाँों

यहा, उन जविंों

ों उखे!

7 बहतसमिँ;

जब अपनचढ़ँ,

उनकक-रहिँ।

8 ोंसम

चलते-चलतगल ै,

और ्‍िगरसम

सकें।

9 इससपहलि ाँिों पर

हरिों लगे,

वह उनें बवडर उड़एगा।

10 धरऐसपलटखकर आनिा।

वह अपनों ्‍लहएगा।

11 तब मनकहेंे,

"ि्‍चय धरफल िलतै;

ि्‍चय परम्‍वर ै,

पर करतै।"

Estes versículos te tocaram? Ore agora!

+581 estão orando agora.

Junte-se à corrente de oração.

Veja também