1,2 यहोवा का धन्यवाद करना भला है;
हे परमप्रधान, तेरे नाम का भजन गाना भला है।
3 भोर को तेरी करुणा
और रात को तेरी सच्चाई का
प्रचार दस तारवाले वाद्यों,
सारंगी और वीणा पर
संगीत बजाते हुए करना भला है।
4 क्योंकि हे यहोवा,
तूने मुझे अपने कार्यों से आनंदित किया है;
मैं तेरे हाथों के कार्यों
के कारण जय जयकार करूँगा।
5 हे यहोवा, तेरे कार्य कितने महान हैं!
तेरे विचार बहुत गहरे हैं!
6 पशु समान मनुष्य इसे नहीं जानता,
और मूर्ख इसे नहीं समझता :
7 चाहे दुष्ट घास के समान फूले-फलें,
और सब अनर्थकारी समृद्ध हो जाएँ,
फिर भी वे सर्वदा के लिए
नष्ट हो जाएँगे;
8 परंतु हे यहोवा, तू सदा ऊँचे पर विराजमान रहेगा।
9 क्योंकि हे यहोवा, तेरे शत्रु,
हाँ तेरे शत्रु नष्ट होंगे;
सब अनर्थकारी तितर-बितर हो जाएँगे।
10 परंतु तूने मेरा सींग जंगली साँड़ के सींग के समान ऊँचा किया है;
तूने मुझ पर ताज़ा तेल उँडेला है।
11 मेरी आँखों ने मेरे शत्रुओं को पराजित होते देखा,
और मेरे कानों ने
उन कुकर्मियों के विनाश को सुना
जो मेरे विरुद्ध उठ खड़े हुए थे।
12 धर्मी लोग खजूर के वृक्ष के समान फूले-फलेंगे,
और लबानोन के देवदार के समान बढ़ते रहेंगे।
13 वे यहोवा के भवन में रोपे गए हैं;
वे हमारे परमेश्वर के आँगनों में फूले-फलेंगे।
14 बूढ़े हो जाने पर भी वे फलते रहेंगे;
वे स्वस्थ और लहलहाते रहेंगे,
15 ताकि यह प्रकट हो कि यहोवा सच्चा है;
वह मेरी चट्टान है,
और उसमें कुछ भी कुटिलता नहीं है।