1 हे यहोवा, मैं तुझे पुकारता हूँ;
मेरे लिए फुर्ती कर!
जब मैं तुझे पुकारूँ,
तो मेरी ओर कान लगा।
2 मेरी प्रार्थना तेरे सामने सुगंधित धूप,
और मेरा हाथ फैलाना तेरे लिए संध्या-बलि ठहरे।
3 हे यहोवा, मेरे मुख पर पहरा बैठा;
मेरे होठों के द्वार की रखवाली कर।
4 मेरे मन को किसी बुरी बात की ओर फिरने न दे;
मैं अनर्थकारियों के साथ दुष्टता के कार्यों में न लगूँ,
और न मैं उनके स्वादिष्ट व्यंजनों में से कुछ खाऊँ।
5 धर्मी जन मुझे मारे तो यह करुणा होगी,
और वह मुझे ताड़ना दे
तो यह मेरे सिर पर का तेल ठहरेगा;
मेरा सिर उससे इनकार न करेगा।
परंतु अनर्थकारियों के बुरे कामों के विरुद्ध मैं प्रार्थना में लगा रहूँगा।
6 जब उनके न्यायी चट्टान के पास गिराए जाएँगे,
तो वे लोग मेरे वचन सुनेंगे,
क्योंकि वे मधुर हैं।
7 अधोलोक के मुँह पर हमारी हड्डियाँ ऐसे बिखरी हुई हैं,
जैसे भूमि पर हल चलाते समय
ढेले टूटकर बिखर जाते हैं।
8 परंतु हे यहोवा मेरे प्रभु,
मेरी आँखें तेरी ही ओर लगी हैं;
मैं तेरा शरणागत हूँ;
तू मेरे प्राण की रक्षा कर।
9 मुझे उस फंदे से,
जो उन्होंने मेरे लिए लगाया है,
और अनर्थकारियों के जाल से बचा।
10 दुष्ट लोग अपने ही जालों में फँस जाएँ,
पर मैं बचकर निकल आऊँ।