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Psalms 72

िथन

भजन

1 परम्‍वर, अपन,

जपअपनिकतरदकर!

2 वह रजिकते,

और िों िपकषतकरे।

3 रजिपहांि

और पहिाँ िकतकर आएँ।

4 वह रजिों करे,

और दरिों बच,

और अतचल े।

5 जब तक और रमबनरहेंे,

तब तक

भय नतरहेंे।

6 वह कटपर वरसम,

और ि ींचन

समो।

7 उसकिों ें धरे-फलें,

और जब तक रमटल

तब तक बड़ांि बनरहे।

8 वह समसमतक

और महनद तक रभकरे।

9 मरि िउसकमनटनें

और उसकशतिें।

10 तरऔर प-दउपहँ;

और सबेंअरिकरें।

11 सब उसडवतकरें,

ि-ि उसकअधँ।

12 ोंि वह दरिा,

और ितथअसहउदकरा।

13 वह िबल और दरिपर तरस एगा,

और दरिों बचएगा।

14 वह अतऔर िंउनकरककरा,

और उसक्‍ि ें उनकलहअनमठहरा।

15 वह िरहे,

और ें उसि

उसकििथन;

और िभर उसधनकह

16 ें बहअन्‍ो,

यहाँ तक ि पहों िाँ अन्‍भरपँ;

उसकें लबवदों समउठें,

और नगर समलहलहँ।

17 उसकसदा-सरवदबनरहे।

जब तक असिै,

उसकितर बढ़तरहे।

उसकरण िाँ आशिँ,

और उसधनकहें।

18 धनयहपरम्‍वर,

इसएल परम्‍वर ै;

आश्‍चरयकरवल वहकरतै।

19 उसकमहिमय सरवदधनरहे;

और उसकमहिपरिो।

आम, िआम

20 िऊद थनसम्‍ं।

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