1 हे यहोवा, मेरे शत्रु कितने बढ़ गए हैं!
बहुत से हैं जो मेरे विरुद्ध उठ रहे हैं।
2 बहुत से हैं जो मेरे प्राण के विषय में कहते हैं
कि परमेश्वर की ओर से उसका छुटकारा नहीं। सेला।
3 परंतु हे यहोवा, तू तो मेरे चारों ओर मेरी ढाल है,
तू मेरी महिमा है, और मेरे सिर को ऊँचा उठानेवाला है।
4 मैंने ऊँची आवाज़ से यहोवा को पुकारा,
और उसने अपने पवित्र पर्वत से मुझे उत्तर दिया। सेला।
5 मैं लेटकर सो गया।
मैं फिर जाग उठा,
क्योंकि यहोवा मुझे संभालता है।
6 मैं उन हज़ारों मनुष्यों से नहीं डरता,
जो मेरे विरुद्ध घेरा डाले हुए हैं।
7 उठ, हे यहोवा! हे मेरे परमेश्वर मुझे बचा!
क्योंकि तूने मेरे सब शत्रुओं के जबड़ों पर मारा है,
और दुष्टों के दाँत तोड़ डाले हैं।
8 उद्धार यहोवा ही से होता है;
हे यहोवा तेरी आशिष तेरी प्रजा पर हो। सेला।