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Psalms 14

मनखतऔर रष्‍टत

िशक िऊद भजन

1 अपनमन ें कहतै,

"परम्‍वर नहीं।"

रष्‍ैं और िकरतैं।

ऐसनहीं भलकरतो।

2 यहवरमनों पर ्‍ि करत

ि ि ि,

परम्‍वर नहीं।

3 सब भटक गए ैं,

सब सब रष्‍गए ैं;

भलकरननहीं, एक नहीं।

4 करननहीं समझते,

ों ऐसैं

ों,

और यहनहीं े?

5 उन पर भय गयै,

ोंि परम्‍वर धरिों14:5 अक्षरशः धर्मी पीढ़ी ै।

6 ्‍ि ठटों ें उड़ो,

परयहउसकशरणसै।

7 भलि इसएल उदिरकट ो!

जब यहअपनरजआई एगा,

तब मगन और इसएल आनिा।

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