1 मैं यहोवा की दुहाई देता हूँ;
मैं यहोवा के सामने ज़ोर-ज़ोर से गिड़गिड़ाता हूँ।
2 मैं उसके सामने अपना दुखड़ा रोता हूँ;
मैं अपनी कठिनाई को उसके सामने प्रकट करता हूँ।
3 मेरी आत्मा मेरे भीतर व्याकुल होती थी,
पर तू मेरे पथ को जानता था।
मैं जिस रास्ते से जाता हूँ,
वे उसी में मेरे लिए फंदा लगाते हैं।
4 दाहिनी ओर आँख उठाकर देख,
कोई मेरी ओर ध्यान नहीं देता,
मेरे लिए कहीं शरण नहीं रही;
कोई मेरी चिंता नहीं करता।
5 हे यहोवा, मैंने तेरी दुहाई दी है;
मैंने कहा, तू मेरा शरणस्थान है,
जीवितों की भूमि पर तू मेरा भाग है।
6 मेरी पुकार को सुन,
क्योंकि मैं बड़ी दुर्दशा में पड़ा हुआ हूँ;
जो मेरे पीछे पड़े हैं उनसे मुझे बचा,
क्योंकि वे मुझसे अधिक बलवान हैं।
7 मुझे बंदीगृह से निकाल
कि मैं तेरे नाम का धन्यवाद करूँ।
धर्मी लोग मेरे चारों ओर होंगे,
क्योंकि तू मुझ पर उपकार करेगा।