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Psalms 109

शतिरतिथन

िशक िऊद भजन

1 परम्‍वर, ैं ि करतूँ!

रह;

2 ोंि ्‍और कपटमनों िुँै,

उनोंिषय ें ै।

3 उनोंशबों िै,

और अकरण पर आकरमण िै।

4 बदलें िकरतैं,

परैं थनें रहतूँ।

5 उनोंभलबदलें झस

और बदलें झसै।

6 उस पर ि्‍मनि्‍कर,

और लगउसकिओर खड़रहे।

7 जब उसकवह ठहरे,

और उसकथनसमझ

8 उसकिों;

उसकपद और े।

9 उसकबच्‍अनँ,

और उसक्‍िधव

10 उसकबच्‍े-िें,

और ाँें; उनें अपनउजड़ों

कर कड़ाँगनपड़ें।

11 दख़छल उसकसब े;

और परदउसककमें।

12 उस पर करकरनरहे,

और उसकअनबच्‍ों पर तरस

13 उसक,

सरें उसकि

14 उसकवजों अधरयहमरण रहे,

और उसकि

15 ितर यहमनरहें

ि वह उनकि तक

पर िे।

16 ोंि उसदयकरनमरण रहा,

बलि वह , दरिऔर ियक्‍ि

लनिउनकपड़रहता।

17 उसपसा,

पर उसपर पड़ा;

वह आशिरसन्‍ा,

इसलिआशिउससरही।

18 उसनअपनवस्‍समपहन िा;

उसकें सम

और उसकहडिों ें समसम

19 वह उसकिओढ़नवस्‍ठहरे,

और कटितरह उसककमर ें सदरहे।

20 यहओर ििों ो,

और िकहनों यहबदलिे।

21 परयहरभु,

अपनअनझसयवहकर;

करउततम ै,

इसलिे।

22 ैं और दरिूँ,

और दय यल ै।

23 ैं ढलतसमिटतरहूँ;

ैं िसमिगयूँ।

24 उपवकरते-करतटनिबल गए,

और चरबरहनशरगयै।

25 ैं उनकििंबन गयूँ;

खकर ििैं।

26 परम्‍वर यहा,

सहयतकर!

अपनकरअनबचा,

27 ि ें ि यह ै।

यहा, यह िै।

28 सतरहें,

पर आशिे।

जब उठें लज्‍िों,

परआनिो।

29 ििों अनदर वस्‍पहन

और उनें अपनलज्‍दर समओढ़नपड़े।

30 ैं यहबहधनयवकरूँा;

और बहों ैं उसकि करूँा।

31 ोंि वह दरििओर खड़रह

ि उसों बच

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